France Heatwave: फ्रांस में रिकॉर्ड तोड़ सकती है गर्मी, रेड अलर्ट जारी

France Heatwave: फ्रांस में लाखों लोग भीषण गर्मी वाली रात के बाद पसीने से तर-बतर होकर जागे। देश की ज्यादातर आबादी को बहुत ज्यादा और असाधारण तापमान का सामना करना पड़ा। तापमान दिन-रात बहुत ज्यादा बना रहेगा, क्योंकि राष्ट्रीय मौसम सेवा, ‘मेटियो फ्रांस’ ने 54 इलाकों के लिए ‘रेड हीट वेव अलर्ट’ जारी किया है। ऐसे देश में जहां बड़े पैमाने पर एयर-कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है, वहां स्कूल, ट्रेन और खेल के आयोजन प्रभावित हुए हैं, जबकि वीकेंड के बाद से डूबने से लगभग 20 लोगों की मौत की खबर है।

इंसानों की वजह से हो रहे जलवायु परिवर्तन का संबंध मौसम की चरम स्थितियों (जैसे बहुत ज्यादा गर्मी) के बढ़ने से है और संयुक्त राष्ट्र की जलवायु एजेंसी का अनुमान है कि अगले पांच सालों में गर्मी के और भी रिकॉर्ड टूट सकते हैं। मेटियो फ्रांस ने कहा, “पूरे फ्रांस में तेज धूप बनी हुई है, जिससे देश भर में भीषण और थका देने वाली गर्मी पड़ रही है।” मौसम की ये चरम स्थितियां कम से कम इस हफ्ते के अंत तक बनी रहने की उम्मीद है और कई शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फॉरेनहाइट) से ऊपर जा सकता है।

मेटियो फ्रांस ने कहा, “तापमान के और भी रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है, जिनमें से कुछ तो साल के किसी भी समय के पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकते हैं।” मौसम विभाग का कहना है कि ये लू बहुत जबरदस्त है और गर्मियों की शुरुआत में ही आ गई है, “लेकिन ये कितने समय तक चलेगी, ये अभी पक्का नहीं है।” इसकी तुलना पहले ही अगस्त 2003 की लू से की जा रही है, जब आधी सदी से भी ज्यादा समय में सबसे ज्यादा तापमान के कारण अनुमानित 15,000 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से कई बुज़ुर्ग थे जो बिना एयर कंडीशनिंग वाले अपार्टमेंट और रिटायरमेंट होम में रहते थे।

उस लू के बाद फ्रांस ने ‘हीट वॉच वॉर्निंग सिस्टम’ (लू की चेतावनी देने वाली प्रणाली) शुरू की थी। यूरोपीय संघ की ‘कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस’ के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जहां 1980 के दशक से तापमान वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप ऑफिस ने इस महीने बताया कि पिछले चार सालों में पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी वजहों से दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई, और इनमें से ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती थीं। औसत से ज्यादा तापमान की वजह से हीट एग्जॉशन (गर्मी से बहुत ज्यादा थकान) और जानलेवा हीट स्ट्रोक (लू) हो सकता है।

ईयू की मॉनिटरिंग एजेंसी ने पाया कि यूरोप और दुनिया भर में, 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा और इस महाद्वीप में “हीट स्ट्रेस” (गर्मी के तनाव) वाले दिनों की संख्या दूसरी सबसे ज्यादा रही। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से गर्मी और सूखे की समस्या और तीव्रता लगातार बढ़ रही है, खासकर दक्षिण-पूर्वी यूरोप में, जिससे ये इलाका सेहत पर पड़ने वाले असर और जंगल की आग के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

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