Uttarakhand: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे तापमान और सूखे मौसम के बीच अब जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। पहाड़ों में धधकती वनाग्नि न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि इसका असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जंगलों से उठते धुएं के गुबार के कारण लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और गर्मी में लगातार बढ़ोतरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महत्तिम यादव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से मौसम बेहद शुष्क बना हुआ है और तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते वन अग्नि की घटनाओं में इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि पूरे फायर सीजन में अब तक गढ़वाल जनपद में वनाग्नि की 39 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें करीब 55 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया है।
डीएफओ ने कहा कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए वन विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं। जिन क्षेत्रों से आग लगने की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल टीमें भेजकर आग बुझाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए कई क्रू स्टेशन बनाए गए हैं और फायर वाचरों की तैनाती भी की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर जंगलों में आग लगाने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएफओ ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी को भी जंगल में आग लगाने वालों की जानकारी मिले तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें और जंगलों को बचाने में विभाग का सहयोग करें।वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं से वातावरण पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। चारों ओर फैले धुएं के कारण आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है। अस्थमा और दमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है। लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए ताकि जंगलों, वन संपदा और वन्यजीवों को कम से कम नुकसान पहुंचे और आम जनता को राहत मिल सके।