Trump China Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी कि ताइवान को लेकर मतभेद दोनों देशों के बीच टकराव या संघर्ष का कारण बन सकते हैं। चीन के सरकारी मीडिया ने ये जानकारी दी। आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ द्वारा प्रकाशित द्विपक्षीय वार्ता के विवरण के अनुसार, यहां बंद कमरे में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि अगर ताइवान का मामला अच्छी तरह से संभाला जाता है, तो अमेरिका-चीन संबंध ‘‘पूरी तरह स्थिर रहेंगे’’।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, ‘नौ साल बाद चीन में आपका स्वागत है। पूरी दुनिया हमारी बैठक पर नजर रखे हुए है। शी ने कहा कि लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो दोनों देशों के सामने ‘‘टकराव और यहां तक कि संघर्ष’’ का खतरा है, जिससे पूरे संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे, ट्रंप और चीन ने दो घंटे की बातचीत के बाद अपनी बैठक समाप्त की।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, ‘राष्ट्रपति, मैं हमारे दोनों देशों और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण प्रमुख मुद्दों पर आपकी चर्चाओं के लिए उत्सुक हूं, और चीन-अमेरिका संबंधों के विशाल जहाज को सही दिशा देने और उसे आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हूं, ताकि 2026 चीन-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय खोलने वाला एक ऐतिहासिक वर्ष बन सके’।
ताइवान के मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सख्त चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जिनपिंग ने कहा कि ताइवान के मुद्दे को अमेरिका गलत तरीके से न संभाले, इसे लेकर चीन-अमेरिका में संघर्ष हो सकता है। बता दें कि, ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले अमेरिका में स्थित चीन के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर अमेरिका को चेतावनी दी थी। चीन ने कहा कि अमेरिका-चीन संबंधों में ‘चार लाल रेखाएं’ हैं, जिन्हें चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। चीन ने जिन चार मुद्दों को सबसे संवेदनशील बताया, उनमें ताइवान का सवाल, लोकतंत्र और मानवाधिकार, दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्था और चीन के विकास का अधिकार शामिल हैं। चीन ने साफ संकेत दिया कि इन मुद्दों पर किसी भी तरह का दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ताइवान मुद्दा सबसे अहम-
ताइवान का मुद्दा भी इस बैठक में अहम रहने वाला है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को हथियार देने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी है, हालांकि उसकी डिलीवरी अभी शुरू नहीं हुई है। ताइवान दुनिया में चिप निर्माण का बड़ा केंद्र है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रंप अमेरिका में चिप उत्पादन बढ़ाने के लिए ताइवान के साथ व्यापारिक सहयोग मजबूत करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने हैं। ट्रंप के साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी चीन पहुंचे हैं। इसके अलावा टेक, रक्षा, कृषि और वित्त क्षेत्र के कई बड़े कारोबारी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं।