Kerala: सत्ता में एक दशक, क्या पिनाराई विजयन तीसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे?

Kerala: केरल की राजनीति का मिजाज कुछ अलग है, यहां अक्सर विचारधारा ही सत्ता की सीढ़ियां तय करती है। मतदाता किसी भी काम की तारीफ या आलोचना करने से पीछे नहीं हटते, इन हालात के केंद्र में, राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन जैसे दिग्गज नेता हैं।

विजयन का जन्म 1945 में कन्नूर में हुआ था। उन्होंने सीपीआई (एम) में आयोजक, रणनीतिकार और व्यवस्था के जानकार के रूप में अपनी पहचान बुलंद की। उनकी राजनीतिक पहचान पार्टी संरचना – उसके अनुशासन, उसके पदानुक्रम और उसकी विचारधारा – से गहराई से प्रभावित थी। दशकों की मशक्कत के बाद वे जमीनी कार्यकर्ता से केरल की राजनीति के सबसे ताकतवर शख्सियत में शुमार हुए।

विजयन ने 2016 में मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। पांच साल बाद, यानी 2021 में गठबंधन को लगातार दूसरी अभूतपूर्व जीत दिलाई। पिछले 10 साल में विनाशकारी बाढ़, भूस्खलन और वैश्विक महामारी के दौरान, विजयन के काम-काज पर काफी चर्चा हुई। उन्हें भरपूर समर्थन मिले तो सख्त आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। जरूरत से ज्यादा केंद्रीकरण के आरोप लगे। विपक्ष ने जमकर आलोचना की। राजनीतिक तनाव के मुद्दों ने कई बार उनके प्रशासन की परीक्षा ली।

फिर भी, विजयन विचलित नहीं हुए। हर वक्त उनका नजरिया राज्य के भविष्य के लिहाज से रहा। सरकार बेशक भविष्य की रूपरेखा तैयार कर रही हो, लेकिन मौजूदा सियासी माहौल तनाव से भरा हुआ है। विपक्षी दल कई मुद्दों पर उन्हें निशाना बनाते रहे हैं। विजयन के शासन काल में केंद्र की एनडीए सरकार के साथ लगातार टकराव देखने को मिले। पिछले एक दशक से संघवाद प्रमुख मुद्दा रहा। विजयन और उनके मंत्री लगातार केरल को केंद्र के लगाए वित्तीय प्रतिबंधों का विरोध करते रहे।

विजयन की अगुवाई में सीपीआई (एम) ने एक और मुद्दे को हवा दी। राज्य में बीजेपी और मुख्य विपक्षी गठबंधन यूडीएफ के बीच घनिष्ठ रिश्तों का आरोप लगाया। विजयन के लिए, 2026 का विधानसभा चुनाव महज राजनीतिक चुनाव नहीं, बल्कि वैचारिक चयन भी है। एक ऐसा मुकाबला है, जिसमें एक ओर वाम गठबंधन है, तो दूसरी तरफ एकजुट होता विपक्ष, अगर चार मई को एलडीएफ को जीत मिलती है तो ये ऐतिहासिक रूप से गठबंधन का लगातार तीसरा कार्यकाल होगा।

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