Harbhajan Singh: हाई कोर्ट पहुंचे हरभजन सिंह, पंजाब पुलिस की सुरक्षा को दोबारा बहाल करने की मांग

Harbhajan Singh: पिछले दिनों आम आदमी पार्टी (एएपी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है कि पंजाब सरकार को उनकी सुरक्षा बहाल करने का निर्देश दिया जाए।

पूर्व क्रिकेटर सिंह ने राघव चड्ढा समेत एएपी के छह राज्यसभा सदस्यों के साथ 24 अप्रैल को बीजेपी का दामन थाम लिया था, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने उनका सुरक्षा घेरा वापस ले लिया था। पंजाब पुलिस द्वारा सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने जालंधर में सिंह के आवास के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती कर दी।

एएपी के कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और अशोक मित्तल के घरों के बाहर प्रदर्शन किया था। जालंधर और लुधियाना में उनके घरों की दीवारों पर स्प्रे पेंट से ‘गद्दार’ लिख दिया था। हरभजन ने अपनी याचिका में कहा है कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा) ने उन्हें खतरे का कोई ताजा आकलन किए बिना और उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का मौका दिए बिना ‘बहुत ही मनमाने तरीके से’ उनका सुरक्षा घेरा वापस ले लिया।

याचिका में आधिकारिक प्रतिवादियों को सुरक्षा घेरा बहाल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि पंजाब पुलिस द्वारा उनका सुरक्षा घेरा वापस लिए जाने के फौरन बाद 25 और 26 अप्रैल को हिंसक भीड़ ने उनके घर पर हमला कर दिया और इस दौरान स्थानीय पुलिस मौजूद थी, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की।

याचिका के अनुसार, ‘‘दिलचस्प बात ये है कि 25 अप्रैल की सुबह, याचिकाकर्ता के आवास पर तैनात सभी पुलिसकर्मी चले गए और जालंधर के उपायुक्त ने आम आदमी पार्टी के सदस्यों को याचिकाकर्ता के आवास पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी। दोपहर लगभग 2:30 बजे, एक भीड़ याचिकाकर्ता के आवास पर पहुंची और घर की बाहरी दीवारों पर ‘गद्दार’ लिख दिया।’’

याचिका में बताया गया है कि सिंह उस समय किसी निजी आयोजन के लिए मुंबई में थे और उनके एक रिश्तेदार ने घर पर भीड़ के हमले के बारे में फोन से जानकारी दी। याचिकाकर्ता ने कहा कि एडीजीपी ने सुरक्षा घेरा वापस लेने का आदेश जारी करते हुए जालंधर के पुलिस आयुक्त को जरूरी सुरक्षा बंदोबस्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं किया गया।

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