US Iran War: ट्रंप ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम बढ़ाया; ईरानी सेना ने तीन जहाजों पर गोलीबारी की

US Iran War: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमले किए और उनमें से दो को अपने कब्जे में ले लिया, यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाएगा।

युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने वाला था। ट्रंप ने यह भी कहा है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखेगा। ईरानी मीडिया ने कहा कि जहाजों पर इन हमलों को ईरान के अर्द्धसैन्य बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अंजाम दिया। ईरानी सरकारी टेलीविज़न के अनुसार ये जहाज अब रिवोल्यूशनरी गार्ड के कब्जे में हैं और उन्हें ईरान ले जाया जा रहा है।

इन जहाजों की पहचान ‘एमएससी फ्रांन्सेस्का’ और ‘एपामिनोड्स’ के रूप में की गई है। जहाजों के मालिकों से इस मामले पर टिप्पणी के लिए फिलहाल संपर्क नहीं हो सका। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ‘यूफोरिया’ नामक तीसरे जहाज पर भी हमला किया। खबरों में कहा गया कि यह जहाज ईरान के तट के पास है, हालांकि इस बारे में ज्यादा विवरण नहीं दिया गया।

ब्रिटेन की सेना के ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर’ (यूकेएमटीओ) के अनुसार ईरान ने जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर गोलीबारी की, और थोड़ी ही देर बाद एक दूसरे जहाज पर भी हमला किया। ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को बंद करने और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध से पैदा गतिरोध ने इस बात पर संदेह पैदा कर दिया है कि संकट को समाप्त करने के लिए बातचीत कब या फिर से शुरू होगी या नहीं।

इन हमलों ने जलडमरूमध्य में परिवहन के लिए खतरों को और उजागर कर दिया है, जिसके रास्ते युद्ध से पहले दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती थी। इस संघर्ष के कारण गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं और कई उत्पादों की लागत में भी वृद्धि हुई है, यूरोपीय संघ के ऊर्जा आयुक्त डैन जोर्गेनसेन ने उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर दीर्घकालिक प्रभाव की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण यूरोप को प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ यूरो (60 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का नुकसान हो रहा है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हवाई हमलों के साथ शुरू हुए युद्ध के बाद से पश्चिम एशिया में जहाजों पर 30 से अधिक हमले हो चुके हैं। इस बीच दो पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि इस्लामाबाद अभी भी तेहरान से यह जानकारी मिलने का इंतजार कर रहा है कि वो अपना प्रतिनिधिमंडल कब भेजेगा।

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