Bikaner: राजस्थान में बीकानेर के इस इलाके में धरती से लेकर आसमान तक हर ओर गिद्ध ही गिद्ध नजर आते हैं, इसकी वजह है जोड़बीड़ में बना गिद्ध संरक्षण केंद्र।इस केेंद्र की गिनती देश के अहम गिद्ध संरक्षण केंद्रो में होती है। विदेशी पक्षियों के लिए सुरक्षित होने के कारण इसे ‘गिद्धों का स्वर्ग भी कहा जाता है।
यहां हजारों पक्षी विशाल खारे पानी की झील पर मंडराते रहते हैं। इनमें से ज्यादातर हर सर्दियों में मध्य एशिया के मंगोलिया, कजाकिस्तान और रूस जैसे देशों से पांच हजार से ज्यादा किलोमीटर की यात्रा करके यहां आते हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से भी यहां गिद्ध पहुंचते हैं।
उप-वन संरक्षक संदीप कुमार छलानी ने कहा कि “जोड़बीड़ में गिद्ध की भारत में पाई जाने वाली नौ प्रजातियों में से अभी चार प्रजातियां यहां पर नियमित रूप से आती हैं और सभी प्रजाति के पक्षी आ चुके हैं। उनमें हैं हिमालयन ग्रिफॉन, इंडियन वल्चर, इजिप्शियन वल्चर और सिनेरियस वल्चर ये चारों यहां पर आ चुके हैं। उसके अलावा रैप्टर (शिकारी पक्षी) की भी कई प्रजातियों के पक्षी भी यहां पर आगमन हो चुका है। ये मुख्यत: अक्टूबर के मध्य में आना प्रारंभ हो जाते हैं, दीपावली के पश्चात या दीपावली के आसपास और शीतकाल प्रवास यहां पर ये करते हैं।”
जोड़बीड़ मृत जानवरों की सबसे बड़ी डम्पिंग साइट है। इससे गिद्धों समेत दूसरे शिकारी पक्षियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन के साथ रहने के लिए यहां भरपूर जगह मिलती है, यहां पक्षी प्रेमी और वन्यजीव फोटोग्राफर भी बड़ी तादाद में आते हैं।
जोड़बीड़ सिर्फ शिकारी पक्षियों के लिए ही नहीं बल्कि कुरजां के लिए भी जाना जाता है। यहां 20 हजार से अधिक प्रवासी पक्षी कुरजां अस्थायी रूप से बसेरा बनाए हुए हैं जो साइबेरिया जैसे ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की कठिन यात्रा कर हर साल अक्टूबर में राजस्थान पहुंचते हैं और मार्च तक यहां प्रवास करते हैं।
डीएफओ वेंकटेश ने बताया कि “डेमोइसेल क्रेन बोलते हैं वो साइबेरियन, यूरोप, साइबेरिया कंट्री से सेंट्रल एशियाई कंट्री से माइग्रेट करके आती हैं इंडिया। मुख्य कारण ये है कि इधर इनको ब्रीडिंग सीजन, जो ब्रीडिंग होता है वो ब्रीडिंग सीजन के लिए अच्छा टेंपरेचर मिलता है राजस्थान में और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में। इसलिए एक टेंपरेचर की वजह से इधर ब्रीडिंग आसानी से हो पाता है। यूरोपियन कंट्री और साइबेरियन कंट्री में अभी बहुत ज्यादा ठंडा मौसम चल रहा है, इसलिए वो माइग्रेट करके इंडिया की तरफ आते हैं।))
वन विभाग ने साल 2008 में जोड़बीड को रिजर्व कंजर्वेशन एरिया घोषित किया था। इसके बाद से क्षेत्र में गिद्धों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।