Gujarat: एक पंख और उससे खुलती पक्षियों की पूरी दुनिया, गुजरात के राजकोट ज़िले के जसदण की जूना पीपलिया स्कूल में शिक्षक आशीषभाई विट्ठलभाई रमानी ने पंखों की इसी दुनिया को बच्चों के लिए विज्ञान की प्रयोगशाला बना दिया। राज्य स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित आशीषभाई ने प्राकृतिक रूप से गिरे पंखों का संग्रह तैयार किया है। क़रीब 80 पक्षी प्रजातियों का विजुअल कलेक्शन तैयार कर बच्चों को पंखों की बनावट, उड़ान और पक्षियों की पहचान का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जा रहा है।
इस शोध की ख़ासियत है कि अध्ययन के लिए किसी पक्षी को पकड़ा या फिर उसे नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। जूना पीपलिया और जीवापर गांव के आसपास बांध, नदी, खेत और वन क्षेत्रों में अध्ययन के ज़रिए पक्षियों, प्राणियों और पेड़-पौधों की स्थानीय जैव विविधता को भी दस्तावेजों में शामिल किया गया है। कुछ ऐसी प्रजातियों की मौजूदगी भी सामने आई, जो अब पहले की तुलना में कम दिखाई देती हैं।
ये प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में अनुभव आधारित और प्रयोगात्मक शिक्षा पर ज़ोर के संकल्प को भी पूरा करता है। डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग राजकोट, रीजनल कम्युनिटी साइंस सेंटर और इनोवेशन फेयर जैसे मंचों तक पहुंचा ये प्रयास दिखाता है कि अनुभव आधारित शिक्षा के लिए बड़े संसाधन नहीं, बल्कि नई सोच ज़रूरी है। एक पंख से शुरू हुई ये पहल बच्चों में प्रकृति की पहचान और उसके संरक्षण की समझ विकसित कर रही