Uttarakhand: उत्तराखंड के देहरादून और मसूरी में कई किराए पर बाइक देने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। सड़क परिवहन प्राधिकरण ने पाया कि वे निजी वाहन भी किराए पर दे रहे थे। साथ ही उन जगहों के लिए भी वाहन देते थे, जो उनके व्यावसायिक लाइसेंस की सूची में नहीं हैं।
प्राधिकरणों ने मोटर वाहन अधिनियम और रेंटल मोटरसाइकिल योजना के उल्लंघन के लिए जुर्माना और सेवा बंद करने की चेतावनी का नोटिस दिया है। इससे वाहन सेवा देने वालों को अपनी खामियां सुधारने का समय मिल गया है।
अब किराये पर बाइक देने वाले कई लोगों ने भरोसा दिया है कि उन्होंने विभाग की शिकायतें दूर कर ली हैं और अब वे नियमों के मुताबिक काम करेंगे। कई लोगों ने अधिकारियों से चालान में देरी जैसी समस्याएं दूर करने की अपील की है। उनका कहना है कि अक्सर किराए पर वाहन लेने वाले नियम तोड़ते हैं, लेकिन देरी होने से चालान उन्हें भरना पड़ता है।
आरटीओ की कार्रवाई से किराए पर बाइक देने वालों पर जिम्मेदारी से नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ा है। लोगों को उम्मीद है कि इससे आने वाले समय में वाहनों का सुचारू संचालन होगा।
इस कदम से उन सैलानियों को भी सहूलियत होगी, जो उत्तराखंड में सड़क यात्राओं के लिए रेंटल बाइक सेवाओं पर निर्भर हैं। ये सुनिश्चित होगा कि किराए पर ली गई गाड़ियां वैध हैं और उनकी यात्रा सुरक्षित रहेगी।
आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि “पहले ये कि उनका लाइसेंस किसी और एड्रेस का है और वो चला रहे हैं रेलवे स्टेशन के पास से, जो कि अवैध है। उसके लिए उनको नोटिस जारी कर दिया गया है और उनके कुछ प्रतिष्ठान हमने वहां से बंद भी करवाए हैं कि जब तक वैध लाइसेंस विद दिस ऐड्रेस नहीं ले लेंगे, तब तक यहां से नहीं चला सकते।
दूसरा, इसमें सिर्फ और सिर्फ कमर्शियल गाड़ियां चलाई जा सकती हैं। और इनके द्वारा प्राइवेट गाड़ियों को भी किराए पर दिया जा रहा है, जो टूटी मोटर वेहिकल एक्ट का उल्लंघन है। चालान की अगर हम बात करें, तो 100 से ऊपर चालान, लगभग 110 चालान हुए हैं, रेंटल मोटरसाइकिल स्कीम, जो देहरादून और मसूरी मिलाके, रेलवे स्टेशन के पास। और इनके पांच से छह प्रतिष्ठान ऐसे थे, जिनके एड्रेस बिल्कुल डिफरेंट थे। तो उनको हमने बंद करवाया।”