Uttarakhand: उत्तराखंड के देहरादून स्थित राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग एक बार फिर हाथी सफारी के रोमांच का आनंद ले सकते हैं। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों के बीच ये बेहद लोकप्रिय आकर्षण है, जो लगभग सात सालों के बाद फिर से वापस लौटा है।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद साल 2018 में हाथी की सवारी रोक दी गई थी क्योंकि न्यायालय में हाथियों के व्यावसायिक उपयोग को रोकने की मांग की गई थी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2019 में प्रतिबंध हटा दिया, जिससे हाथी सफारी का रास्ता फिर से खुला।
24 नवंबर को फिर से शुरू हुई हाथी सफारी जंगल की खोज का धीमा लेकिन रोचक तरीका है, जो पर्यटकों को जंगल और वहां रहने वाले जीवों के साथ जुड़ने का बेहतरीन मौका देती है।
पार्क प्रशासन ने जंगल घूमने के लिए सफारी के दो रास्ते बनाए हैं, जो पर्यटकों को सुरक्षित, सुगम और वन्यजीवों के देखने का सुंदर अनुभव देते हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक ये पहल इको-पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देती है, क्योंकि हाथी सफारी जीप सफारी की तुलना में ज्यादा शांत और कम प्रदूषणकारी होती है।
पर्यटक रंगनाथ पाण्डेय ने कहा कि “हाथी बहुत आराम से जाता है। प्रकृति के बीच आप घूमते हैं। तरह-तरह की वनस्पतियों का आपका अवलोकन होता है। जंगली जानवरों को नजदीक से देखने का आपको अवसर मिलता है। इन सब चीजों के अलावा हाथी की जो सवारी है न वो अपने में ही खुद एक रोमांचक सवारी है। उसका अगर आप लुत्फ उठाते हैं को वो एक बहुत अलग अनुभव है।”
पर्यटक ब्रह्म योगी विकेश ने बताया कि “उत्साहित बहुत हैं कि हाथी पर बैठकर कैसा लगेगा? और जंगलों से तो खास प्रेम है। और जंगलों का संग और हाथी के उपर सवारी एक बहुत अच्छी फिलिंग आ रही है।
इसके साथ ही चिल्ला रेंज वन क्षेत्राधिकारी विजेंद्र दत्त तिवारी ने कहा कि “जब लोग हाथियों को देखते हैं और हाथी चलते हैं तो सबकी एक जिज्ञासा होती है कि हम भी हाथी पर चढ़कर जंगल का लुत्फ लें। और जंगल की वाइल्ड लाइफ देखें, जिसके लिए लोग यहां आते हैं। ट्रैक भी हमने काफी सुगम बनाया। जिसमें जंगल का आनंद ले सकें और पता चले की जंगल क्या होता है।”