Ramnagar: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर के पास कनियान ग्राम सभा की महिलाएं इन दिनों हर्बल गुलाल बनाने में व्यस्त हैं। क्योंकि होली नजदीक है और रासायनिक रंगों के प्राकृतिक विकल्पों की मांग बढ़ रही है।
यहां गुलाल बनाने वाली महिलाएं कहती हैं कि इसके लिए वे अरारोट पाउडर का इस्तेमाल करती हैं और रंगों के लिए फलों, सब्जियों और को प्रयोग में लाती हैं, जिससे त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता है।
ये पर्यावरण-अनुकूल पहल महिला संसाधन केंद्र के तहत चलाई जा रही है, जिसे हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन का समर्थन हासिल है।
गुलाल बनाने वालों के मुताबिक उन्होंने अब तक तीन से चार क्विंटल हर्बल गुलाल का उत्पादन किया है और इसे 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रहे हैं।
रंगों का त्योहार होली बुधवार चार मार्च को मनाया जाएगा और उम्मीद है कि हर्बल रंग इस खुशी के मौके पर खेलने वालों को प्राकृतिक और पर्यावरण की सुंदरता का एहसास कराएगा।