Magh Mela: धर्मनगरी हरिद्वार में अवधूत मंडल आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. संतोषानंद देव महाराज ने प्रयागराज में चल रहे माघ मेले और कल्पवास की पवित्रता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। एक हालिया बयान में उन्होंने माघ मेले के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसे ‘मजाक’ न बनाने की अपील की।
स्वामी डॉ संतोषानंद देव ने कहा कि कल्पवास और माघ स्नान की परंपरा आज की नहीं बल्कि अनादि काल से चली आ रही है। श्रद्धालु हर साल 40 दिनों तक गंगा-यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम पर साधना, पूजा-पाठ, ध्यान और दान-पुण्य करते हैं। उन्होंने बताया कि झोपड़ी (पर्णकुटी) में रहकर सात्विक जीवन और ब्रह्मचर्य का पालन करना ही वास्तविक कल्पवास है।
शंकराचार्य के काफिले की घटना पर प्रतिक्रिया
वहीं हाल ही में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को रोके जाने और उनके द्वारा किए गए विरोध पर स्वामी डॉ संतोषानंद ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा, “शंकराचार्य जी को वहां वैसे जाने की आवश्यकता ही क्या थी? यदि वे एक साधारण श्रद्धालु की तरह स्नान कर लौट आते तो यह अधिक गरिमापूर्ण होता।”
उन्होंने आगे कहा कि चाहे कोई संत हो या शंकराचार्य, यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो उससे संतों और देश की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे संगम तट पर केवल साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए आएं।