Holi 2026: उत्तराखंड के देहरादून स्थित दून पुस्तकालय व अनुसंधान केंद्र होली की उमंग से भरा नजर आया। जहां छोटे छात्र खेल-खेल में रंग लगा रहा रहे थे. इस उत्सव की खास बात यह रही इस्तेमाल किए गए रंग जैविक थे और छात्रों ने खुद बनाए थे।
उन्होंने एक कार्यशाला में हिस्सा लिया था, जिसमें उन्हें प्राकृतिक रंग बनाना सिखाया गया था, जो बाजार में बिकने वाले रासायनिक रंगों का एक सुरक्षित विकल्प है।
दून पुस्तकालय एवं अनुसंधान केंद्र के प्रभारी मेघा ने बताया कि “अभी होली आने वाली है और मार्केट में केमिकल रंग मिलते हैं, तो हमने ये सोचा था कि बच्चों को कैसे सिखाया जाए कि नेचुरल कलर्स कैसे बनाया जाए, घर की चीजों से, तो घर में जैसे हल्दी, मेहंदी, बीट्स रूट, सब्जियां, फ्रूट्स,होते ही हैं हमारे पास, तो उनसे ही हम ये रंग बना रहे हैं। हम बेस लेकर चलते हैं अरारोट (जिसे कॉर्नस्टार्च या कॉर्नफ्लोर भी कहते हैं)। उसमें हम मिक्स करते जाते हैं, इसमें अगर हम हल्दी या चंदन मिलाते हैं, तो येलो हो जाता है। बीट रूट पीस कर अरारोट में मिलाते हैं, तो पिंक या रेड, जितना गाढ़ा करना चाहते हैं पिंक या रेड हो जाता है।”
प्रतिभागियों का उत्साह साफ नजर आ रहा था, बच्चों ने बताया कि उन्होंने कुछ नया सीखा और इन रंगों के त्वचा के लिए सुरक्षित होने की तारीफ की, कई बच्चों के मुताबिक उन्हें उम्मीद है कि इस होली पर ज्यादा लोग प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करेंगे।
चार मार्च को होली का त्योहार है, ऐसे में प्राकृतिक, रसायन-मुक्त रंगों पर जोर बढ़ता जा रहा है, कार्यशाला में भाग लेने वाले बच्चों ने उम्मीद जताई कि रंगों के इस त्योहार के दौरान पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत कल्याण को बढ़ावा देने का उनका संदेश व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचेगा।