Haldwani: हल्द्वानी अतिक्रमण विवाद, रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश

Haldwani:  हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, 31 मार्च तक पुनर्वास प्रक्रिया पूरी करने के दिए हल्द्वानी में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्वास को लेकर स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि परियोजना से जुड़ा गतिरोध अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकता और पुनर्वास प्रक्रिया को समयबद्ध व पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाना आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कराने के लिए स्थल पर विशेष पुनर्वास कैंप लगाए जाएं। साथ ही 31 मार्च 2026 तक 2019 की पुनर्वास नीति के तहत उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से बताया गया कि लाइन के रियलाइन्मेंट के लिए 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। जिन संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है, उनके लिए प्रत्येक प्रभावित परिवार को छह माह तक 2000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रस्ताव रखा गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों को छोटे भूखंडों का स्वामी चिन्हित किया गया है, उनकी भूमि विधिवत अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत ही ली जाएगी।

कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण करने वालों को यह हक नहीं है कि वे उसी जगह पर रहने की मांग करें या रेलवे को जमीन के इस्तेमाल का फैसला बताएं। यह मामला लंबे समय से चल रहा है।  रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर जमीन पर बनभूलपुरा, गफूर बस्ती और अन्य इलाकों में हजारों अवैध निर्माण बने हुए हैं, जहां अनुमानित 5,000 से अधिक परिवार (करीब 50,000 लोग) रहते हैं।  कोर्ट ने निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए, खासकर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के लोगों को पीएमएवाई के तहत आवास के लिए अप्लाई करने में मदद मिले।

कोर्ट ने आदेश दिया कि नैनीताल जिले की रेवेन्यू अथॉरिटी, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक सप्ताह का कैंप लगाएं, जहां पीएमएवाई के फॉर्म भरे जा सकें। यह कैंप 19 मार्च से शुरू हो। बनभूलपुरा में पुनर्वास केंद्र बनाया जाए, जहां हर परिवार का मुखिया जाकर फॉर्म भर सके। नैनीताल के जिलाधिकारी और एसडीएम हल्द्वानी को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। सामाजिक कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को पीएमएवाई के बारे में जागरूक करें। कोर्ट ने सुनिश्चित करने को कहा कि सभी पात्र परिवारों को पीएमएवाई के तहत आवास मिल सके।

रेलवे का कहना है कि ट्रैक विस्तार और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए इस जमीन की सख्त जरूरत है, खासकर नदी के कारण मौजूदा ट्रैक में दिक्कत आ रही है। यह इलाका रेलवे विस्तार के लिए उत्तराखंड में आखिरी संभावित जगह है, उसके बाद पहाड़ी क्षेत्र शुरू हो जाता है।

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