Silk Expo: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार से जोड़ने पर लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में रेशम उद्योग को नई पहचान देने के उद्देश्य से सिल्क एक्सपो 2026 का आयोजन किया गया।
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश “यहां पर लोकल स्तर पर ही रेशम का उत्पादन, उसकी प्रोसेसिंग की व्यवस्था और फिर आगे को प्रक्रिया के साथ उसको हम वस्त्र उत्पादन के साथ जोड़ते हैं, तो रेशम उद्योग का क्लस्टर प्राचीन काल से काशी और आजमगढ़ रहा है। इसको रॉ मैटेरियल अगर सस्ता मिलता है तो स्वाभाविक रूप से उसकी लागत भी सस्ती आएगी।”
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित सिल्क एक्सपो का उद्घाटन रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। यह एक्सपो प्रदेश के रेशम उत्पादक किसानों, बुनकरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर लेकर आया है।
पी. शिवकुमार, सदस्य सचिव, केंद्रीय रेशम बोर्ड “यहां पर 55 स्टॉल लगे हुए हैं। यहाँ पर पूरे देश का एरी, मुगा, मल्बरी, रेशम का कपड़ा खरीदने का बहुत अवसर है।आपको प्योर सिल्क मिलेगा। यहाँ पर केंद्रीय रेशम बोर्ड का स्टॉल भी है। यहाँ पर सिल्क असली है या नकली है, वो भी आप टेस्ट कर सकते हैं और एक अच्छा कलेक्शन है।”
राज्य में वर्ष 1988 में रेशम विभाग की स्थापना के समय रेशम उत्पादन मात्र 27 मीट्रिक टन था, जो आज बढ़कर 450 से 500 मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत अगले 10 वर्षों में 13,500 किसानों को जोड़ने और 9,000 एकड़ में शहतूत रोपण से 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मो. आमिर, बुनकर “बुनकरों को काफ़ी लाभ होता है, प्रचार होता है और जो सामान बनाते हैं, ये हाथ से वीविंग करके बनाते हैं, मेहनत से बनाते हैं, टाइम लगता है। इनकी कला का थोड़ा प्रदर्शन भी हो जाता है और रोज़ी-रोटी भी चलती है।” सिल्क एक्सपो 2026 में केंद्रीय रेशम बोर्ड से रजिस्टर्ड उत्तर प्रदेश सहित बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक समेत कई राज्यों के बुनकर और व्यापारी हिस्सा ले रहे हैं। एक्सपो में शुद्ध रेशमी उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है।