Prayagraj: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राम लीला मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं, संगम शहर में कटरा रामलीला कमेटी कई साल से रामायण का मंचन कर रही है। कमेटी की राम लीला में हिंदुओं के अलावा मुस्लिम समेत दूसरे धर्मों के कलाकार अलग-अलग किरदार निभाते हैं।
राम लीला के कलाकारों का कहना है कि उनके लिए जाति, धर्म या दूसरी पहचान कोई मायने नहीं रखती। जब वे अपना किरदार निभाते हैं तो सिर्फ अपने कैरेक्टर पर ध्यान देते हैं। राम लीला भगवान राम के जीवन पर आधारित नाटक है। इसका मंचन नवरात्रि के दौरान किया जाता है, इस साल राम लीला तीन अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक होगी।
निदेशक संजय चौधरी ने कहा कि “हमारे हिसाब से 60 से 65 लोग शामिल हैं, कलाकार उसमें मुस्लिम भी हैं कलाकार जो शबरी और अहिल्या और मंथरा का रोल निभा रहे हैं और अच्छे ढंग से निभा रहे हैं। उनको अच्छी ट्रेनिंग दी जा रही है। वो टैलेंटेड हैं, फिर भी वो कर रही हैं।”
इसके साथ ही कलाकारों का कहना है कि “अगर हमारे कल्चर की बात की जाए, संस्कृति की बात की जाए तो हमारे में तो वर्ण व्यवस्था के अनुसार कहा ही ये जाता है कि कलाकार की कोई जात, धर्म नहीं होती। तो यहां पर भी यही चीज देखने को मिलती है, हम हैं हर कास्ट, हर धर्म से आने वाले लोग हैं पर उस समय में कैरेक्टर हम लोग कर रहे होते हैं वो मात्र वही रहता है उसके अलावा ऐसा कुछ नहीं रहता कि कोई पर्सनल फीलिंग है बहुत हारमनी है बहुत अच्छे से रहते हैं, बहुत फैंडली हैं।”