भारत के वंडरलैंड इंफाल जायें तो ये जगह जरूर देखें

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भारत का एक तिलिस्मी शहर है इंफाल जिसे आप विदेशी परीकथा ‘एलिस इन वंडरलैंड’ जैसा इंडिया का वंडरलैंड कह सकते हैं।

क्‍यों जायें इंफाल

हिमालय के पूर्वी सिरे पर उत्तर में फैली पर्वतमालाओं के बीच बसा है मणिपुर का शहर इंफाल। यहां खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के बीच आप पाएंगे जीवंत उत्सवधर्मी लोग, सहेजी हुई प्राचीन धरोहरें और भारत की सतरंगी सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक। यहां हरियाली से भरे मखमली पहाड़ों के बीच एक जादूई दुनिया सी बसी नजर आती है। यहां पहाड़ों की गोद मे बसे छोटे-छोटे गांवों से होकर गुजरना भी कम अचरज भरा अहसास नहीं। इस जगह की खूबसूरती के बयान मे सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि यहां के प्राकृतिक नजारे अभी तक अनछुए हैं। इस राज्य के पास प्राकृतिक का अमूल्य वरदान है। अगर आप ईको टूरिज्म में रुचि रखते हैं तो यह जगह आपके लिए स्वर्ग के समान है। पहाड़ों के बीचों बीच बसे अंडाकार कटोरे के आकार वाली जगह को देखकर आप बरबस कह उठेंगे सचमुच हमारा देश है रंग-बिरंगा और इसमें इंफाल का रंग है सबसे अलहदा, सबसे जुदा। तो इस जादू को देखने जरूर जायें इंफाल और इन खास जगहों को देखना ना भूलें।

लेकेघास के तैरते टापू

इंफाल से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लोकटक लेक। यह मणिपुर की सबसे बड़ी फ्रेश वॉटर लेक है। इसमें तैरते हुए घास के टापू पाए जाते हैं। यह केवल लेक नहीं घर है लगभग 233 जलीय वनस्पतिक प्रजातियों का,100 से ज्यादा पक्षियों और 425 प्रजातियों के जंगली जीवों का। आप और भी हैरान होंगे जब पाएंगे इसी लेक के भीतर कई मछुवारों के गांव भी मौजूद हैं। यहां रहने वालों के लिए लोकटक लेक जीवनदायनी लेक हैं। पानी पर तैरते छोटे-छोटे घास के टापू किसी जादुई दुनिया के देश जैसे लगते हैं, जो आज यहाँ तो कल तैर कर कहीं और पहुंच जाते हैं। जैव विविधता से परिपूर्ण इस जादुई माहौल में एक और सुंदर जगह है जिसका नाम है सैंड्रा पार्क एन्ड रिजॉर्ट। यह एक टूरिस्ट लॉज है जहां पर सैलानी ठहर सकते हैं।

मणिपुर स्टेट म्यूजियम

पोलो ग्राउंड के साथ ही एक और महत्वपूर्ण जगह है मणिपुर स्टेट म्यूजियम। मणिपुर की ऐतिहासिक- सांस्कृतिक विरासत के नजदीक से दर्शन करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण जगह है। इस संग्रहालय में मणिपुर के राज परिवार के जीवन की झलक और यहाँ के आदिवासी जीवन की झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिल जाती है। इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण है 78 फीट लंबी शाही बोट। छोटा-सा दिखने वाला यह संग्रहालय अपने में 34 आदिवासी जनजातियों व समूहों के जीवन से जुड़ी कुछ नायाब वस्तुओं को समेटे हुए है। यह संग्रहालय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक ही खुलता है।

लॉर्ड सानमही टेंपल

यहीं कांगला पैलेस के प्रांगण मे कांगला-शा के नजदीक ही एक बहुत सुंदर मंदिर भी है, जिसका नाम लॉर्ड सानमही टेंपल है। इसका निर्माण प्रमिड वास्तुकला से मिलता जुलता है, मातेई समाज की आराधना पद्धति में प्रकृति का बड़ा महत्व है। ये लोग प्रकृति की हर चीज की पूजा करते हैं। यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है। नदी, पहाड़, सूरज, चंद्रमा, जंगल, जीव जन्तु, सांप आदि इनके लिए पूजनीय हैं।

शहीद मीनार

बीर टिकेंद्राजीत पार्क के बीचों बीच बनी यह शहीद मीनार अपनी मातृभूमि के लिए अंग्रेजों के खिलाफ वर्ष 1891 मे अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर आदिवासियों योद्धाओं की याद में बनाई गई है। मणिपुर मे पाए जाने वाले 34 प्रकार के आदिवासी जनजातियों का अपनी मातृभूमि से विशेष लगाव रहा है। यो कहें कि इन आदिवासी जनजातियों का प्रकृति के साथ एक अटूट रिश्ता है, जिसकी झलक इनके पूरे जीवन को देखने से मिलती है।

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