ये पहाड़ी फूल है सेहत के लिए खास…

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उत्तराखंड का राज्य पुष्प बुरांश जो की पहाड़ी क्षेत्रों की सुंदरता के साथ-साथ उसकी आर्थिकी के साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बना रहता है, लेकिन बसंत ऋतु आने पर प्रकृति पहाड़ो की खूबसूरती पर जैसे चार चाँद लगा देती है। माघ, फागुन, चैत्र, बैशाख माह जैसे मौसमी फल, फूलों आदि के लिए वरदान देने वाले होते है। इन्ही में एक ऐसा मौसमी फूल है “बुरांश” या “बुरुंश ” जिससे मार्च अप्रैल में पहाड़ो की धरती लाल श्रृंगार करती है।

 

इसके फूलों से जूस बनाकर पहाड़ी क्षेत्र के लोग अपनी आमदनी करते हैं, जबकि आयुर्वेदिक औषधी बनाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है, हृदय संबंधी बीमारियों में इसके जूस का प्रयोग बहुत ही लाभकारी माना जाता है।

 

  • बुरांश के फायदे

प्राचीन काल से ही बुरांश को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। रोडोडेन्ड्रोन प्रजाति के इस पेड़ में सीजनल बुरांश के लाल, सफेद, नीले फूल लगते हैं। लाल फूल औषधिय गुणों से भरपूर हैं। खास कर हृदय रोग से पीड़ित लोग यदि प्रतिदिन एक गिलास बुरांश का जूस पिएं तो रोग जड़मुक्त हो जाएगा। जबकि शारीरिक विकास व खूनी की कमी में बुरांश का जूस व इससे तैयार उत्पाद अचूक औषधि का काम करती है।

विटामिन बी कॉम्पलैक्स व खांसी, बुखार जैसी बीमारियों में भी बुरांश का जूस दवा का काम करता है। इस बार जमकर हुई बर्फबारी व बारिश ने बुरांश के जंगलों में वर्षो पुरानी रौनक लौटा दी है। खास कर चौरंगीखाल, संगमचट्टी, डोडीताल, दयारा बुग्याल, कुश कल्याण, बेलक क्षेत्र, वरुणा घाटी धनारी, चिन्यालीसौड़, भण्डारस्यूं, बनचौंरा, ब्रहमखाल, मोरी, पुरोला, बड़कोट आदि कस्बों में बुरांश के जंगल फूलों से लाल नजर आ रहे हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों के अनुकूल वातावरण में उगने वाला बुरांश का पौधा फूलों के साथ ही पत्ती, लकड़ी भी बहुउपयोगी है। पर्यावरण संरक्षण में बुरांश का मत्वपूर्ण योगदान है। पत्तियां जैविक खाद बनाने में उपयोग होती है। बुरांश की लकड़ियां फर्नीचर, कृषि उपकरण आदि बनाने में काम आती है।

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