सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दी मेडिकल छात्रों को बड़ी सौगात…

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देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी के नॉन क्लीनिकल पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को सरकार ने सौगात दी है। इस पाठ्यक्रम की सालाना फीस पांच लाख रुपये से घटाकर एक लाख रुपये करने को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंजूरी दी है।

सरकार के इस कदम से उक्त पाठ्यक्रम में दाखिले को लेकर छात्र-छात्राओं की रुचि बढ़ेगी। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की नॉन क्लीनिकल पाठ्यक्रम की रिक्त सीटें भी अब तेजी से भर सकेंगी। दरअसल, पीजी के नॉन क्लीनिकल पाठ्यक्रम की फीस ज्यादा होने की वजह से इसमें छात्र-छात्राओं की रुचि घटी है। इन सीटों पर दाखिले में अभ्यर्थियों की की दिलचस्पी कम दिखाई दी है। एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फॉर्मेकोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री जैसे विषयों में कम ही दाखिले होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जिन विषयों में प्रैक्टिस नहीं है, उनमें डॉक्टर दाखिला लेना ही नहीं चाहते। कई बार वह क्लीनिकल सब्जेक्ट की सीट खाली न होने पर, नॉन क्लीनिकल में एडमिशन लेते हैं। पर बाद में क्लीनिकल की सीट मिलने पर नॉन क्लीनिकल की सीट छोड़ देते हैं। विगत वर्षों में देखा गया है कि नॉन क्लीनिकल में अधिकांश पीजी की सीटें खाली रह गईं। सीट रिक्त होने के कारण संसाधनों की हानि भी होती है। फीस कम होने से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेजों व नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की कमी भी इससे दूर हो सकेगी।

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