आज भू बैकुंठ बद्रीनाथ के कपाट होंगे बंद

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बदरीनाथ धाम के कपाट आज बंद हो रहे है, जो कि शीतकाल में 6 माह के लिए बंद कर दिए जाएंगे। पूजा कार्यक्रम में आज सुबह भगवान को फूल मालाओं  से सजाया जाएगा। जिसके बाद परंपरागत विधिविधान के साथ भगवान बद्रीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए अगले 6 माह के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस मौके पर आज कई श्रद्धालु कपाट बंद होने के गवाह बनेंगे। बता दें कि अब तक लगभग 1.70 हजार श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर चुके है। इससे पहले 15 नवंबर को गंगोत्री और 16 को केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट बंद हुए थे। देश के चारधाम में से एक बदरीनाथ धाम के कपाट आज ब्रहस्पतिवार दोपहर 3 बज कर 35 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। बता दें कि मंदिर समिती से जुड़े लोग और भक्तों की उपस्थिति में कपाट बंद करने की प्रतिकिर्या होती है।

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पूजा करने के देवताओं के अधिकार

धर्माधिकारी के मुताबिक जब सूर्य वृश्चिक राशि में रहता है, तब इसकी आधी अवधि तक मनुष्यों का बद्रीनाथ धाम में पूजा का अधिकार रहता है। इसके बाद यहां पूजा करने के अधिकार देवताओं के रहते है। बद्रीनाथ उत्तराखंड के चारधाम में शामिल है। ये तीर्थ अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। ये धाम करीब 3,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। शीतकाल में यहां का वातावरण बहुत ठंडा हो जाता है, इस वजह से बद्रीनाथ मंदिर के कपाट शीत ऋतु में बंद कर दिए जाते है।

 कपाट बंद होने के बाद नारद मुनि की पूजा

माना जाता है कि बद्रीनाथ जी के कपाट खुलने के बाद यहां नर यानी रावल पूजा करते है और बंद होने पर नारदजी पूजा करते है। यहां नारदजी का मंदिर है। कपाट बंद होने के बाद बद्रीनाथ में पूजा का प्रभार नारदमुनि का रहता है।

 

 

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