गांधी जयंती के दिन भिगोकर पीटे गए किसान, दिल्ली में प्रदर्शन से रोका

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2 अक्टूबर. महात्मा गांधी का जन्मदिन. देश ही नहीं पूरी दुनिया में मनाया जाता है. भारत में भी महात्मा गांधी के जन्मदिन पर कई कार्यक्रम हो रहे हैं. लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में एक अलग ही नज़ारा है. करीब 100 साल पहले अप्रैल 1917 में महात्मा गांधी ने जिनके लिए पहला सत्याग्रह शुरू किया था, वो किसान थे. इस सत्याग्रह को दुनिया चंपारण सत्याग्रह के नाम से जानती है. लेकिन उसी चंपारण सत्याग्रह की अगुवाई करने वाले महात्मा गांधी के जन्मदिन पर जब हजारों किसान दिल्ली में महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर जमा होने जा रहे थे, पुलिस ने उन्हें दिल्ली में घुसने से ही रोक दिया. उनपर लाठीचार्ज किया गया, पानी की बौछार की गई और आंसू गैस के गोले छोड़े गए और ये सब उस दिन हुआ, जिस दिन अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का जन्म दिन था. इसके अलावा भारतीय राजनीति में एक और नेता हुआ, जिसने किसानों को सबसे ज्यादा अहमियत दी. वो थे देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, जिन्होंने नारा दिया था जय जवान-जय किसान. 2 अक्टूबर को उनका भी जन्मदन होता है, लेकिन देश की राजधानी में गांधी और शास्त्री के जन्मदिन के दिन ही किसानों पर लाठियां चलाई जा रही हैं. देखिए वीडियो:

दिल्ली में क्यों आ रहे थे किसान?

किसानों ने 23 सितंबर को हरिद्वार से किसान क्रांति यात्रा निकाली थी.

किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में करीब 30,000 किसान 23 सितंबर को हरिद्वार में जुटे थे. वहां से ये किसान दिल्ली के लिए पैदल चले, जिसे नाम दिया गया किसान क्रांति यात्रा. इस किसान क्रांति यात्रा में किसानों के साथ ही ट्रैक्टर और ट्रॉली भी थीं. अपनी मांगों को लेकर निकले ये किसान 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के जन्मदिन पर राजघाट पहुंचने वाले थे. वहां महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद इन किसानों को राजघाट से संसद भवन तक विरोध मार्च निकालना था. हजारों की संख्या में जमा हुए ये किसान जब 23 सितंबर को हरिद्वार से निकले तो किसी भी सरकार ने इनकी सुध नहीं ली. 10 दिन की यात्रा के बाद जब किसानों का ये जत्था 1 अक्टूबर की शाम को दिल्ली से सटे साहिबाबाद तक पहुंचा, तब दिल्ली पुलिस को लगा कि मामला हाथ से निकल रहा है. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने किसानों की यात्रा पर रोक लगा दी. दिल्ली पुलिस और यूपी पुलिस ने मिलकर किसानों को 1 अक्टूबर की शाम होते-होते साहिबाबाद में बैरिकेडिंग कर रोक दिया और फोर्स तैनात कर दी गई.

क्या हैं किसानों की मांगें?

पिछले छह महीने में ये चौथी बार है, जब किसानों ने आंदोलन किया है.

पूरे देश के किसान अपनी मांगों को लेकर पिछले छह महीने में चार बार आंदोलन कर चुके हैं. हर बार की तरह इस बार भी उनकी वहीं मांगे हैं, जो वो लंबे अरसे से दोहराते रहे हैं.

# स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें लागू की जाएं.

# किसानों का पूरा कर्ज माफ हो.

# बिजली के दाम घटाए जाएं.

# 60 साल से अधिक की उम्र के किसानों को 5,000 रुपये की पेंशन दी जाए.

# 10 साल पुराने ट्रैक्टर पर लगाया गया प्रतिबंध वापस लिया जाए.

# प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए.

# योजना का लाभ कंपनियों के बदले किसानों को दिया जाए.

# सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में उपलब्ध करवाई जाए.

# किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए.

# महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए.

# आवारा पशुओं से किसानों के फसल को बचाने का इंतजाम किया जाए.

बाबा रामदेव भी दे चुके हैं समर्थन

किसानों की इस यात्रा को योग गुरु बाबा रामदेव भी समर्थन दे चुके हैं. 23 सितंबर को किसान जब हरिद्वार से निकल रहे थे, तो स्वामी रामदेव ने किसानों से मुलाकात की थी. बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ में किसानों का स्वागत किया था और शुभकामनाएं दी थीं.

क्या हुआ पुलिस और किसानों के बीच?

2 अक्टूबर की सुबह जब किसानों ने साहिबाबाद बॉर्डर से आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया. किसानों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. फिर भी किसान नहीं माने, तो पुलिस ने पहले आंसूगैस के गोले छोड़े और जब उससे भी काम नहीं बना तो वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. किसान लगातार बॉर्डर पर आगे बढ़ने की कोशिश में लगे हैं, वहीं पुलिस उन्हें रोकने की हर संभव कोशिश कर रही है.

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