Olympics 2036: पानी में होने वाले खेलों, नौकायन और साइकिलिंग पर ज्यादा जोर

Olympics 2036: भारत 2036 ओलंपिक बोली की तैयारी कर रहा है। बुनियादी ढांचा शायद ही चिंता का विषय है, क्योंकि दावेदार शहर अहमदाबाद पहले से ही काफी तैयार दिख रहा है। लेकिन आधिकारिक हलकों में भारत की पदक रणनीति में कुछ मूलभूत बदलावों पर मंथन चल रहा है, ताकि पानी में होने वाले और साइकिलिंग जैसे खेलों में भारत की स्थिति मजबूत हो। इन दोनों स्पर्धाओं में कुल मिलाकर 100 से ज्यादा ओलंपिक पदक हैं, लेकिन भारत को अभी तक एक भी पदक नहीं मिला है।

खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया की मेजबान देश अपने ओलंपिक प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं ताकि अपने ही धरती पर ओलंपिक में उपेक्षित न हों।” चीन ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में यही किया था, और मुक्केबाजी, नौका विहार और तीरंदाजी जैसे खेलों में, जबरदस्त सुधार करते हुए रिकॉर्ड 100 पदक जीते थे। इनमें वो पहले अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा था।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने सदस्य देशों से सुझाव लेने के बाद अपने मानदंडों का फिर से मूल्यांकन करने के लिए मेजबान चयन प्रक्रिया को रोक दिया है। सूत्र ने बताया कि ये प्रक्रिया छह महीने बाद शुरू होगी।

उसने कहा, “भारत खेल जगत के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। चुनौती ये सुनिश्चित करना है कि हम यहां से गिरें नहीं, बल्कि आगे बढ़ें। बुनियादी ढांचा चिंता का विषय नहीं है। ये सबसे आसान और शायद ज्यादा दिखने वाला पहलू है। इसीलिए इस पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

उसने कहा, “सबसे बड़ी चिंता एक खेल राष्ट्र के रूप में हमारी प्रतिष्ठा है।” लिहाजा स्कूलों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जहां देश भर में 2036 के संभावित सितारे मिलेंगे। जिन खेलों में भारत की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन पदकों की संख्या अधिक है, उन पर प्रतिभा पहचान कार्यक्रम अपना पूरा ध्यान केंद्रित करेगा। इसलिए, जलीय खेल, नौकायन और साइकिलिंग को प्राथमिकता सूची में ऊंची जगह दी जाएगी।

जलीय खेलों में तैराकी, गोताखोरी, वाटरपोलो, कलात्मक तैराकी और खुले पानी में तैराकी शामिल हैं। यही बात रोइंग पर भी लागू होती है, जिसमें लॉस एंजिल्स में 15 स्पर्धाओं में 45 पदक दांव पर हैं। साइकिलिंग पर भी 22 स्पर्धाओं में 66 पदक दिए जाएंगे।

देश के एथलीट विकास कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “चुनौती ये है कि हम अपना ध्यान मजबूत स्पर्धाओं से हटाकर ऐसी स्पर्धाओं पर केंद्रित करें, जिनमें पदक जीतने की संभावना अधिक है, लेकिन हम अभी तक मुकाबले में कहीं नहीं हैं।”

यहीं पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आगे चलकर फिटनेस बैटरी टेस्ट के माध्यम से उपयोगी साबित होगा, जो हृदय संबंधी सहनशक्ति, मांसपेशियों की ताकत, गति और चपलता, लचीलापन और संतुलन के साथ-साथ रफ्तार मापने के लिए किए जाने वाले अभ्यासों की श्रृंखला है।

सूत्र ने बताया, “जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान करने में एआई उपयोगी साबित होगा। बुनियादी परीक्षणों से सटीक परिणाम पाने के लिए एआई का उपयोग किया जा सकता है। इससे हमें ऐसी प्रतिभाओं को खोजने में मदद मिलेगी जो शायद अपनी क्षमता से भी अनजान हों और उन्हें हमारे प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंचाया जा सकेगा।”

खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को राज्यसभा में 2036 की ओलंपिक खेलों की मेजबानी की बोली के बारे में कहा, “भारत सरकार ओलंपिक खेलों की मेजबानी से जुड़ी ऐतिहासिक वित्तीय चुनौतियों से पूरी तरह अवगत है।” उन्होंने आगे कहा, “जहां तक ​​केंद्र सरकार का संबंध है, उसकी नीतियों और योजनाओं के प्राथमिक उद्देश्य सतत खेल अवसंरचना, जमीनी स्तर का विकास और 2036 ओलंपिक जैसे आयोजनों के लिए उच्च प्रदर्शन की तैयारी हैं।”

2036 से पहले, भारत के सामने अहमदाबाद में ही 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी है। ये आयोजन अपनी प्रासंगिकता बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन इसमें भारत ने लगभग हमेशा ही सभी खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इसलिए, चुनौती ये है कि ऐसे बजट के भीतर आयोजन किया जाए जिससे जनता में आक्रोश न फैले और संचालन सुचारू रूप से हो।

यदि अहमदाबाद ऐसा करने में सफल होता है, तो ये 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के घावों को भर देगा, जो वित्तीय गबन के आरोपों और 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च के साथ अब तक के सबसे महंगे खेलों के रूप में जाने जाने से विवादों में घिरे थे।

मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, “सबसे पहले, 2030 के खेल 2010 की तरह केंद्रीकृत नहीं होंगे। निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे और मार्च तक एक आयोजन समिति गठित कर दी जाएगी।” उन्होंने आगे कहा, “भारत परिकल्पना और योजना बनाने में तो अच्छा प्रदर्शन करता है, लेकिन क्रियान्वयन में पीछे रह जाता है। इसे 2030 तक दुरुस्त कर लिया जाएगा।”

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