जब इंडिया के क्रिकेट मैच के दौरान हादसे में 9 लोग मर गए, फिर भी मैच चलता रहा

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26/11. 26 नवंबर. 2008 के बाद से भारत में इस तारीख से मनहूसियत आ लिपटी है. मुंबई हमले की ट्रेजेडी इतना बड़ा सदमा है कि इस तारीख का ज़िक्र भर सिहरन से भर देता है. 2008 से पहले भी ये तारीख तकलीफदेह रही है. फर्क सिर्फ इतना है कि पहले वाले केस में किसी आतंकवादी की करतूत न होकर क्रिकेट मैदान में हुआ हादसा था.

साल था 1995. नागपुर का विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन (VCA) ग्राउंड. न्यूज़ीलैण्ड की टीम भारत के दौरे पर थी. पांच वन डे मैचेस की सीरीज़ का आख़िरी मैच था. भारत 2-1 से लीड कर रहा था. एक मैच कैंसिल हो गया था. ये मैच जीतकर सीरीज़ जीत जाता भारत. उस वक़्त वन डे क्रिकेट का भयानक क्रेज़ था. ऊपर से सीरीज़ डिसाइडर मैच. मैच शुरू होने से पहले ही स्टेडियम फुल था.

भारत ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग चुनी. अज़हर का ये फैसला ग़लत साबित हुआ. न्यूज़ीलैण्ड ने ज़बरदस्त बैटिंग की. 50 ओवर में 348 रनों का पहाड़ खड़ा किया. नैथन एस्टल ने सेंचुरी मारी. मार्टिन क्रो और स्टीफन फ्लेमिंग ने भी जमकर हाथ खोले. मैच की पहली इनिंग ख़त्म होते-होते मुकाबला न्यूज़ीलैण्ड की झोली में जाता साफ साफ दिख रहा था. लंच ब्रेक हुआ, और तभी…..

लंच ब्रेक के दौरान ईस्ट स्टैंड की एक दीवार गिर गई. नई बनी फैंसी रेलिंग पर काफी सारे लोग खड़े थे. वो सब तकरीबन 70 फीट की ऊंचाई से नीचे आ गिरें. नौ लोगों की मौत हो गई. लगभग 70 लोग घायल हो गए. स्टेडियम वालों के हाथ पैर फूल गए. लेकिन उसके बाद जो हुआ वो और भी हैरान कर देने वाला था.

मृतकों और घायलों को तुरंत हॉस्पिटल पहुंचाया गया. जल्दी-जल्दी घटनास्थल को संवारा गया. ड्रेसिंग रूम में मौजूद खिलाड़ियों को हादसे के बारे में नहीं बताया गया. मैच कैंसिल करने पर विचार हुआ लेकिन आयोजकों को डर लगा कि पब्लिक भड़क जाएगी. तोड़फोड़ कर देगी. उन्होंने मैच जारी रखने का फैसला किया. मैच जारी रहा. भारत बैटिंग करने उतरा और मैच हार गया. 99 रनों से. सचिन और जडेजा का संघर्ष बेकार रहा. सीरीज़ 2-2 से बराबर रही.

आज उस घटना को 22 साल हो गए. तबसे अब तक नागपुर में कई मैच हो चुके हैं. बिना किसी हादसे के. वो हादसा आज भी दुःख देता है. 26 नवंबर की तारीख पर दुःख का साया और भी गहराता है.

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