Punjab: पंजाब की अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवानों ने सोमवार को 77वां गणतंत्र दिवस यादगार बना दिया। सीमा हजारों उत्साही दर्शकों से खचाखच भरी थी। खास कर गणतंत्र दिवस के दिन वे देशभक्ति की भावना से सराबोर थे।
सीमा चौकी पर राष्ट्रीय ध्वज उतारने की दैनिक रस्म से पहले, यहां की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। मल्लखंब जैसे एथलेटिक करतब के साथ पंजाबी और दूसरे मनमोहक लोक नृत्यों ने दर्शकों में जोश भर दिया। उन्होंने कलाकारों के कौशल और सटीकता की जमकर तारीफ की।
बीएसएफ बाइकर्स के रोमांचक स्टंट और जोश भरे संगीत की धुन ने दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया। बीएसएफ के डॉग स्क्वाड ने अपने कुशल प्रशिक्षण से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनमें देशी नस्लों के कुत्ते भी थे।
सूरज ढलने पर ध्वजारोहण समारोह शुरू हुआ। बीएसएफ के जवान सटीक मार्च करते हुए निकले। ये समारोह की अनूठी खासियत है और दुनिया भर में मशहूर है। सीमा पर देशभक्ति के नारे गूंज रहे थे। लोग भावुक थे। तिरंगा लहराते हुए दर्शक देशभक्ति की धुनों पर थिरकने से खुद को नहीं रोक पाए।
सूर्यास्त के समय ध्वज उतारने की रस्म के साथ कार्यक्रम खत्म हुआ। बीएसएफ का कौशल और राष्ट्रीय गौरव हर किसी के लिए यादगार बन गया। इस सीमा चौकी पर रोजाना होने वाला समारोह 1959 से चला आ रहा है। ये भारत के प्रमुख सैन्य आकर्षणों में एक है। 77वें गणतंत्र दिवस ने समारोह में चार चांद लगा दिए।