PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों से भारत की विविध जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाने और उच्च मूल्य वाली फसलों की पैदावार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर देश के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ पर बजट के बाद आयोजित एक वेब गोष्ठी को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मानकों के सभी पहलुओं पर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों को एक साथ आना होगा। प्रधानमंत्री ने बजट के बाद अपनी तीसरी वेब गोष्ठी में कहा, ‘‘आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और वैश्विक मांग बदल रही है। कृषि को निर्यातोन्मुख बनाने पर अधिक चर्चा करना आवश्यक है। हमारे पास विविध जलवायु है और हमें इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। हम कृषि-जलवायु क्षेत्रों के मामले में समृद्ध हैं।’’
पीएम मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में काजू, कोको और चंदन सहित उच्च मूल्य वाली कृषि पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल और दलहन पर राष्ट्रीय मिशन और प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन सभी कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘यदि हम उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हैं, तभी हम अपनी खेती को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल सकते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रही है और समग्र स्वास्थ्य सेवा और जैविक भोजन पर उनका विशेष ध्यान है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें रसायन मुक्त और प्राकृतिक खेती पर अधिक जोर देना चाहिए। प्राकृतिक खेती दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचने का रास्ता बनाती है।’’ पीएम मोदी ने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है और सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग 10 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से चार लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं।’’ उन्होंने पूर्वोत्तर में अगरवुड और हिमालयी राज्यों में शीतोष्ण फलों को बढ़ावा देने के बजट प्रस्ताव पर भी प्रकाश डाला।
पीएम मोदी ने कहा, ‘‘अगर हम उच्च मूल्य वाली खेती को मिलकर आगे बढ़ाते हैं, तो ये कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा।’’ मत्स्य पालन क्षेत्र पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है, जहां हमारे विभिन्न जलाशयों और तालाबों में लगभग 4.5 लाख टन मछली का उत्पादन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की क्षमता है। प्रधानमंत्री ने समुद्र से जुड़ी नीली अर्थव्यवस्था की क्षमता को उजागर करने के लिए हैचरी, चारे और लॉजिस्टिक में नए कारोबारी मॉडल की जरूरत पर भी जोर दिया।