Bihar: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से तीन और लोगों की मौत हो जाने के बाद मृतकों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर चार हो गई। अधिकारियों ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम से कम छह अन्य लोगों का सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि सात लोगों को प्रारंभिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
ये घटना गुरुवार को मोतिहारी के तुरकौलिया और रघुनाथपुर इलाकों में हुई। पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कहा, “मृतकों की संख्या अब चार हो गई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत का सटीक कारण रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा।”
जिलाधिकारी ने बताया कि इस घटना के सिलसिले में एक गांव के चौकीदार सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तुरकौलिया थाना के थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कहा कि घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। पुलिस ने बताया कि मृतकों के परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में संकेत मिला है कि पहले पीड़ित ने रघुनाथपुर इलाके में अवैध शराब का सेवन किया था।
प्रभात ने गुरुवार को कहा था, “पुलिस ने शराब आपूर्तिकर्ता की पहचान कर ली है और उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जिला पुलिस और एंटी-लिकर टास्क फोर्स (एएलटीएफ) की टीम परसौनी, मुसहरी टोला और तुरकौलिया में छापेमारी कर रही है। घटना की उच्चस्तरीय जांच का भी आदेश दिया गया है।”
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने पांच अप्रैल 2016 को राज्य में शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया था। घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की शराबबंदी नीति की “विफलता” और उसकी गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ऐसी घटना राज्य में पहली बार नहीं हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2016 से अब तक बिहार में जहरीली शराब के सेवन से 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।”
उन्होंने कहा, “यह केवल आधिकारिक आंकड़ा है, वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। कई लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई है। यह कानून सत्तारूढ़ बीजेपी-जेडीयू के कुछ नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और उनके संरक्षण में फल-फूल रहे शराब माफिया के लिए कमाई का जरिया बन गया है। राज्य में पुलिस की मिलीभगत से खुलेआम जहरीली शराब बनाई जा रही और बेची जा रही है, यहां तक कि शराब की घर पर आपूर्ति की जा रही है।’’