Union Budget 2026: कोल्हापुर का नाम लेते ही, शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जिसके मन में चप्पलों का ख्याल न आए! खूबसूरत कोल्हापुरी चप्पलें न सिर्फ कोल्हापुर की, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की पहचान हैं जिन्हें आम से लेकर खास लोग तक पहनना पसंद करते हैं। शहर में पारंपरिक कारीगरों से लेकर व्यापारी तक हजारों परिवार अपनी रोजी-रोटी के लिए कोल्हापुरी चप्पलों पर निर्भर हैं। इनके बेहतरीन डिजाइन की वजह से इन चप्पलों की मांग देश में ही नहीं, विदेशों में भी है।
हालांकि, पिछले कुछ सालों में हालात मुश्किल हुए हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और आधुनिक जूते-चप्पलों से प्रतियोगिता के चलते छोटे उत्पादक परेशानी का सामना कर रहे हैं। जैसे-जैसे केंद्रीय बजट पास आ रहा है, कोल्हापुरी चप्पलों के काम से जुड़े लोगों को टैक्स में छूट, सरकार से वित्तीय मदद और प्रशिक्षण सत्र मुहैया करवाने की उम्मीद है।
‘प्राडा’ के कोल्हापुरी चप्पलों से प्रेरित फुटवियर कलेक्शन को लेकर विवाद के महीनों बाद, पिछले साल इटली की लग्जरी ब्रांड ने भारत में दो सरकारी संस्थाओं के साथ एमओयू साइन किए। महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थित ये संस्थाएं कोल्हापुरी चप्पलों की विरासत को बचाए रखने और भारतीय चमड़ा उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर देती हैं।
इससे कोल्हापुर में चप्पल बनाने वाले कारीगरों को काम में मुनाफे की उम्मीद जगी है। कारीगरों का कहना है कि बेहतर होगा कि इस सहयोग का फायदा सीधे उन तक पहुंचे। कोल्हापुर के कारीगर सरकार से वित्तीय मदद के साथ- साथ ऐसी योजनाएं शुरू करने की अपील कर रहे हैं जो छोटे उत्पादकों को वैश्विक बाजार में मुकाबला करने में मदद करें।