Supreme Court: चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने मेरिटल रेप के मामलों में पतियों को दी गई छूट को चुनौती देने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई चार हफ्तों के लिए टाल दी, चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।
चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि दिवाली की छुट्टियों पर सुप्रीम कोर्ट के बंद होने से पहले अगर सुनवाई पूरी नहीं हुई तो वे सुनवाई पूरी नहीं कर पाएंगे और फैसला नहीं सुना पाएंगे।
उन्होंने कहा कि सभी वकीलों को मामले में दलीलें पेश करने के लिए इच्छित समय दिया जाना चाहिए। पीठ में जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई चार हफ्ते के बाद किसी दूसरी पीठ के जरिए की जानी तय की, इस मामले में सुनवाई 17 अक्टूबर को शुरू हुई थी।
आईपीसी की धारा-375 के क्लॉज दो और बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा-63 के प्रावधान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन मामलों में बालिग पत्नी के साथ जबरन पति के संबंध के मामले में रेप का केस नहीं हो सकता है।
केंद्र ने कहा कि तेजी से बढ़ते और लगातार बदलते सामाजिक और पारिवारिक ढांचे में संशोधित प्रावधानों के दुरुपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि किसी व्यक्ति के लिए ये साबित करना मुश्किल होगा कि सहमति थी या नहीं।