Solid Waste Management: देश भर में एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू हो जाएगा, इस नियम में कई नए प्रावधान होंगे। नए नियमों में अपशिष्ट को गीले, सूखे, स्वच्छता से जुड़े और खास वर्गों में अलग करना अनिवार्य होगा। प्रदूषण फैलाने वालों से भारी जुर्माना लेने का प्रावधान होगा। नए नियमों से देश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस बदलाव आने की उम्मीद की जा रही है।
पर्यावरणविद् भारती चतुर्वेदी ने बताया कि “नए ठोस अपशिष्ट नियम 2026 से मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि इनमें नगरपालिकाओं को जवाबदेह ठहराया गया है, साथ ही बहुत सटीक तरीके से काम किया गया है। मुझे ये पसंद है, क्योंकि न सिर्फ अलग-अलग तरह के अनौपचारिक मजदूरों को शामिल करने की योजना है, बल्कि योजनाओं को लागू करने की भी अपेक्षा की जाती है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा न करने पर सख्त और कठोर दंड होंगे।”
भारी मात्रा में अपशिष्ट पैदा करने वालों के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। नए नियमों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सभी चरणों पर नजर रखने के लिए केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल का भी प्रावधान है। हालांकि, जानकार इस बात पर जोर देते हैं कि बेहतर असर के लिए जमीनी स्तर पर काम करना जरूरी है।
पर्यावरणविदों ने नए नियमों की तारीफ की और नए मानदंडों का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इसकी कामयाबी असरदार तरीके से लागू करने पर निर्भर करेगी।
पर्यावरणविद् सुनील दहिया ने कहा कि “इन टर्म्स ऑफ पॉलिसी काफा अच्छा कदम लिया गया है, लेकिन हमें लोगों को, एज वेल एज हमारे प्रशासन को, थोड़ा सा इनके बेटर मैनेजमेंट के ऊपर, इम्प्लिमेंटेशन के ऊपर जो इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए, उसको मुहैया कराने के ऊपर ध्यान देना होगा। इसमें काफी ज्यादा पोटेंशियल है पॉल्यूशन को कम करने का। इसमें वेस्ट को सोर्स से कम करने का, और जो हमारा रियूजेबल, रिसाइकिल वेस्ट है, उसको ज्यादा से ज्यादा यूज करने का, ताकि हमारे प्राकृतिक संसाधनों के ऊपर भी बर्डेन कम हो सके।”))
नए नियमों में सभी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं का ऑडिट अनिवार्य है। रोजाना पांच टन से ज्यादा क्षमता वाली सुविधाओं के लिए कुल क्षेत्रफल के भीतर बफर जोन जरूरी है। कुल मिलाकर ये देखना होगा कि इन प्रावधानों को जमीनी स्तर पर कितने असरदार तरीके से लागू किया जाता है।