Rupee vs Dollar: साल 2010 में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 45 रुपये हुआ करती थी, जो मार्च 2026 में गिरकर 94.82 रुपये के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है। पिछले डेढ़ दशक में डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 109% की गिरावट आई है, जो औसतन 4.7% सालाना की दर से है।
गिरावट के प्रमुख कारण-
रुपये की इस लगातार गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी की लगातार निकासी एक बड़ा कारक है। इसके साथ ही, ईरान में जारी संकट और व्यापक मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इन कारकों के चलते रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
| वर्ष | औसत विनिमय दर | गिरावट का कारण |
| 2010 | 45.14 | वैश्विक रिकवरी और स्थिर पूंजी प्रवाह |
| 2013 | 58.59 | टेपर टैंट्रम संकट |
| 2016 | 67.19 | विमुद्रीकरण और वैश्विक अनिश्चितता |
| 2020 | 74.13 | कोविड-19 महामारी और वैश्विक लॉकडाउन |
| 2023 | 82.50 | फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक ब्याज दर वृद्धि |
| 2025 | 87.40 | अमेरिकी टैरिफ और व्यापार युद्ध का प्रभाव |
| 2026 (मार्च) | 94.82 | पश्चिम एशिया में युद्ध संकट और डॉलर की चरम मांग |