Kolkata: महानगर की पहचान मानी जाने वाली कोलकाता की प्रतिष्ठित ट्राम सेवा मंगलवार को 153 साल की हो गई। वजूद खोने की कगार पर खड़ी विरासत को याद करते हुए ट्राम प्रेमियों ने दूसरे विश्व युद्ध के दौर की एक ‘हेरिटेज ट्राम’ किराये पर ली और शहर की सड़कों पर पुरानी यादें ताजा कीं।
‘गीतांजलि’ नाम की ट्राम नोनापुकुर डिपो में खड़ी रहती है। इसे खास मौकों पर बुक किया जा सकता है।
1960 के दशक में ट्राम की 37 लाइन हुआ करती थीं। अब सिर्फ दो लाइन हैं – गरियाहाट-एस्प्लेनेड और एस्प्लेनेड-श्यामबाजार। कई लोगों का तर्क है कि एक बड़ा नेटवर्क बरकरार रखा जाना चाहिए था। हालांकि ‘कलकत्ता ट्राम यूजर्स एसोसिएशन’ का कहना है कि जो भी बचा हुआ है वे उसके लिए आभारी हैं।
धीमी रफ्तार के कारण ट्राम को अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। उसपर ट्रैफिक जाम करने और पटरियों पर चलने वाले रिक्शा, पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों के लिए खतरनाक होने के आरोप लगते रहे हैं।
फिर भी ट्राम प्रेमियों का कहना है कि और ट्राम सेवाएं चलाई जा सकती हैं, खास कर हेरिटेज मार्गों पर।
1873 में घोड़ों से शुरू हुआ ट्राम नेटवर्क एशिया का सबसे पुराना सक्रिय नेटवर्क है। 1882 में ये भाप इंजन और 1902 में बिजली के इंजन से चलना शुरू हुआ। एस्प्लेनेड से खड़रपुर के बीच पहली इलेक्ट्रिक ट्राम चली थी। ट्राम प्रेमियों को अब भी उम्मीद है कि ‘सिटी ऑफ जॉय’ में और भी सेवाएं बहाल होंगी, ताकि ट्राम सिर्फ यादों और तस्वीरों में ही नहीं, बल्कि शहर की परिवहन व्यवस्था के सक्रिय हिस्से के रूप में अपनी पहचान बनाए रखे।