Holi 2026: लाल, गुलाबी, पीले और हरे गुलाल। अगले महीने रंगों के त्योहार ‘होली’ के लिए फिजा में अभी से रंग घुलने लगे हैं। महाराष्ट्र के नागपुर में चटक गुलाल की ढेर सारी क्यारियां धूप में सुखाई जा रही हैं। कारीगर ‘इको-फ्रेंडली’ होली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। अरारोट पाउडर और खाने में इस्तेमाल होने वाले रंगों से बने गुलाल रसायन-रहित और त्वचा के अनुकूल हैं। लिहाजा ये लोगों की पहली पसंद हैं।
इको-फ्रेंडली गुलाल निर्माता रोशन आदमने ने बताया कि “यह गुलाल बनाने का जो काम है वो हमारे दादा जी के जमाने से चलते ही आ रहा है। ये हमारी तीसरी पीढ़ी है अरारोट जो है हम ये अरारोट पाउडर से बनाते हैं। जिसमें अरारोट, कलर और पानी का मिश्रण होता है, वो धूप में सुखाया जाता है। फिर छानकर हमारा गुलाल तैयार होता है। तो हमारा ईको फ्रेंडली गुलाल लोग काफी यूज करेंगे क्योंकि आप देखेंगे जैसे की चलन में लोग जो हैं वो पसंद कर रहे हैं ईको फ्रेंडली गुलाल।
पहले जमाने में रंग से होली खेली जाती थी। तो थोड़ा सा उसका केमिकल वगैरह रहता था उसका। पर कस्टमर अभी अवेयर हो गए हैं। तो वो ये चाह रहे हैं कि इको फ्रेंडली गुलाल रहे, स्प्रिंग फ्रेंडली गुलाल रहे।” “जैसे ही डिमांड आती है मतलब अगर मानकर चलिए नागपुर है, विदर्भ है या फिर कई और स्टेट से भी अगर कुछ डिमांड आई, तो उसके हिसाब से हम वहां पर गुलाल प्रोवाइड करते हैं।
गुलाल बनाने वालों का कहना है कि पिछले सालों के मुकाबले इस बार कीमतों में गिरावट आई है। ये खरीदारों के लिए राहत की बात है, फिजां में होली के रंग घुलने लगे हैं। लोग जोरशोर से होली की तैयारियों में जुटे हैं। नागपुर के हर्बल गुलाल त्योहार को और चमकदार बना रहे हैं। साफ है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए त्योहार की खुशियां मनाना बिल्कुल मुमकिन है।