Data Centres: हर WhatsApp मैसेज, बैंक ट्रांसफर और आपके स्ट्रीम किए गए वीडियो का एक घर होता है। वह घर एक डेटा सेंटर है, हम ऐसे ही एक डेटा सेंटर के बाहर हैं जो भारत के डिजिटल सपने को पावर दे रहा है।” इन दीवारों के भीतर, हजारों ताकतवर सर्वर चौबीसों घंटे काम करते हैं। ये सिर्फ कंप्यूटर नहीं हैं। ये ऐसे सुरक्षित भौतिक रीढ़ हैं जो क्लाउड प्लेटफॉर्म और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी भारी मात्रा में डेटा को स्टोर, प्रोसेस और ट्रांसमिट करते हैं।
हम कंट्रोल एस के एक लाइव डेटा सेंटर के ‘सिक्योर जोन’ में प्रवेश कर रहे हैं। जिन्हें अधिकार मिला हुआ है, वही यहां जा सकते हैं। सुरक्षा की कई परतें सुनिश्चित करती हैं कि सिर्फ अधिकृत लोग ही अंदर जाएं।
कंट्रोल एस डेटा केंद्र के प्रेसिडेंट (सेल्स) अशोक मैसूर ने बताया कि “हम डेटा सेंटर के मुख्य भाग में हैं, जिसे ‘डेटा सेंटर हॉल’ कहा जाता है। यहां ग्राहकों का सारा डेटा स्टोर होता है। इस सर्वर क्षेत्र में ग्राहकों की महत्वपूर्ण आईटी संपत्तियां, जैसे कंप्यूटिंग, स्टोरेज और सुरक्षा उपकरण होस्ट की जाती हैं।”
“ये हमारा यूटिलिटी कॉरिडोर है। यहां डेटा सेंटर के सभी सर्वर हॉल हैं। ये सभी यूटिलिटी रूम हैं जहां पीएएचओ प्रेसिजन एयर कंडीशनिंग, पानी की पाइपलाइन और सर्वर तक कूलिंग की व्यवस्था है। कूलिंग का सारा काम इसी तरफ से होता है। ये यूटिलिटी रूम है। दूसरी बात, जैसा कि हमने आपको यूपीएस रूम दिखाया, यहां एक और यूपीएस रूम है और अलग-अलग बैटरी बैंक हैं। सारा पानी इन्हीं पाइपलाइन से होकर गुजरता है।”
“हमने 2023 में दो बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से कंट्रोल एस शुरू किया था। 2030 के अंत तक हम उस दो बिलियन अमेरिकी डॉलर को खर्च कर देंगे। हम डेटा सेंटर उद्योग में और निवेश करने का वादा करते हैं।”))
इन गलियारों में आप बैंकिंग, ई-कॉमर्स और महत्वपूर्ण डेटा के कई टेराबाइट स्टोरेज के बीच से गुजर रहे होते हैं। “चाहे एप्लीकेशन हो, ऑटोमेशन हो या डिजिटल संदर्भ, एआई महत्वपूर्ण है। लगभग सभी ग्राहक और सरकारें एआई को अपना रही हैं। इस तरह के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को होस्ट करने के लिए खास जगह की जरूरत होती है। इसी वजह से डेटा सेंटर की जरूरत है।”
आप डेटा प्रोसेसिंग की आवाज साफ सुन सकते हैं। लगातार चलते पंखे इन मशीनों को ठंडा रखते हैं। यहां धूल का नामोनिशान नहीं होता। अंदर का तापमान और आर्द्रता का स्तर भी नियंत्रित होता है। उच्च-प्रदर्शन वाले कंप्यूटिंग से काफी गर्मी पैदा होती है। लिहाजा तापमान नियंत्रण के लिए औद्योगिक स्तर के शीतलन व्यवस्था की जरूरत है। इसके लिए सबसे जरूरी है, बिजली। विशाल बैकअप जनरेटर और बैटरी बैंकों के साथ, बिजली आपूर्ति व्यवस्था इस तरह से डिजाइन की गई है, कि ये कभी बंद न हो। तभी जाकर 100 फीसदी संचालन सुनिश्चित होता है।
इंजीनियर हर सर्वर की स्थिति, तापमान में बदलाव और अचानक बिजली बढ़ने की संभावना पर हर समय नजर रखते हैं, ताकि समस्याएं पैदा होने से पहले ही उनका निदान हो। ये मशीनों के पीछे इंसानों की भूमिका है। भारत का डेटा क्षेत्र माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन जैसी कंपनियों के भारी निवेश और कंट्रोल एस जैसी प्रमुख घरेलू कंपनियों की वजह से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय बजट में विदेशी कंपनियों को करों में छूट का ऐलान है। सरकार का अनुमान है कि इससे निवेश बढ़कर 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। इससे ये विश्वास और मजबूत होता है कि जैसे-जैसे वैश्विक और स्वदेशी दिग्गज कंपनियां भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं, ये देश दुनिया के डिजिटल इंजन के रूप में अपनी जगह मजबूत बना रहा है।