Coal India: कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई) के निष्कर्षण के लिए सात खदानों की पहचान की है और टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को ये जानकारी दी।
ये कदम भारत के उन प्रयासों के अनुरूप है, जिनके तहत वो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण आरईई जैसे खनिजों की घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देना चाहता है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में चीन के प्रभुत्व के कारण उत्पन्न चिंताओं के बीच ये कदम उठाया गया है।
एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहान ने बताया, “हमने दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के निष्कर्षण के लिए सात खदानों की पहचान की है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और लगभग एक साल के अंदर हम यह निर्धारित कर लेंगे कि किस क्षेत्र, किस खदान के डंप या ओवरबर्डन में दुर्लभ पृथ्वी तत्व मौजूद हैं।”
उन्होंने कहा कि कंपनी वैज्ञानिक रूप से अध्ययन और अन्वेषण करेगी कि आरईई (अनेक शुद्ध अयस्क) कहां मौजूद हैं और उनके निष्कर्षण के लिए कितना खर्च आएगा। हरीश दुहान ने आगे कहा, “एक साल के भीतर हम खदानों की पहचान कर लेंगे।” पर्याप्त भंडार और मजबूत मांग को देखते हुए, एसईसीएल ने प्रस्तावित लिस्टिंग के बाद लाभ देने का भरोसा जताया। सीएमडी ने कहा, “हमारे पास भंडार हैं, कुल मांग है और हमें विश्वास है कि लिस्टिंग के बाद ये निश्चित रूप से शेयरधारकों की मांग को पूरा करेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि कंपनी कोयला खनन कार्यों में एआई का भरपूर इस्तेमाल कर रही है, हम इसे पहले से और आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।” मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीएमडी) ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में स्थित कंपनी की गेवरा खदान अगले साल दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खदान का खिताब हासिल करने के लिए तैयार है, जिसका उत्पादन 2026-27 में 63 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष खदान का लक्ष्य 56 मिलियन टन है, जो वर्तमान वैश्विक अग्रणी के 62.5 मिलियन टन के उत्पादन को पार कर अगले वर्ष 63 मिलियन टन तक पहुंचा देगा। सीएमडी ने जोर देकर कहा, “2026-27 में, यह खदान दुनिया की सबसे बड़ी खदान होगी और हमारी टीम इसके लिए पूरी तरह से तैयार है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी आवश्यक भूमि, जनशक्ति और मशीनरी तैनात कर दी गई हैं।