Bhairav Battalion: धुएं से निकलते सैनिक – पहले परछाईं के रूप में, फिर दृढ़ निश्चय से भरे चेहरों के साथ। सधे हाथों में हथियार। निगाहें चौकन्नी… पूरे तालमेल के साथ आगे बढ़ते हुए… ऊबड़-खाबड़ जमीन पर बूटों की चरमराहट की आवाज… फिर टीम फैल जाती है, हमले के लिए तैयार…
ऊपर, ड्रोन मंडरा रहे हैं – निगरानी कर रहे हैं, नजर रख रहे हैं, मार्गदर्शन कर रहे हैं। ये सेना का कोई सामान्य अंग नहीं, भैरव बटालियन है। भैरव बटालियन का नामकरण भगवान शिव के उग्र योद्धा के नाम पर किया गया है। आदर्श वाक्य है, ‘अभयम भैरव’ या निर्भीक रक्षक।
ये इकाई भविष्य के युद्ध के अनुरूप है। इसका गठन सेना के युद्ध करने के तरीके में निर्णायक बदलाव का संकेत है, जो रफ्तार, सटीकता और अत्याधुनिक तकनीक का संयोजन करती है। ये बटालियन भारत में बने नवीनतम हथियारों से लैस हैं।
हर बटालियन में सिर्फ 250 सैनिक हैं। कहने को वे पारंपरिक पैदल सेना के आकार का करीब एक तिहाई हैं, लेकिन, विनाशकारी, बहु-क्षेत्रीय मारक क्षमता से लैस हैं। पारंपरिक पैदल सेना लंबे समय तक चलने वाले युद्धों के लिए बनाई जाती है, जबकि भैरव बटालियनें बिल्कुल नई रणनीति के साथ काम करती हैं।
कॉम्पैक्ट और उच्च प्रशिक्षित टीमों से बनी, बटालियन की ताकत संख्या में नहीं, बल्कि सटीकता, अचानक हमला करने और हर भूभाग पर कब्जा करने की क्षमता में है। भैरव बटालियन की पंद्रह टुकड़ियां पहले से काम कर रही हैं। इनके अलावा उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी कमानों में दर्जनों टुकड़ियां गठित की जा रही हैं।
भैरव बटालियन की घोषणा पिछले साल कारगिल विजय दिवस पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की थी। ये सीमा पर बढ़ते खतरों से निपटने के लिए भारत की नवीनतम तैयारी है।