Bengaluru: भारत का आईटी हब बेंगलुरू हैवी ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ के लिए जाना जाता है, इसको देखते हुए एक प्राइवेट स्कूल ने सड़कों पर जाम में फंसे छात्रों की मदद के लिए स्कूल बसों में बायो-टॉयलेट की व्यवस्था की है।
इंडस इंटरनेशनल स्कूल की बसों में बायो-टॉयलेट की ये पहल देश में पहली बार की गई है। सरजापुर रोड पर बने इस स्कूल में बेंगलुरू के अलग-अलग हिस्से से काफी छात्र-छात्राएं आते हैं।
उन्होंने अभिभावकों के साथ मिलकर स्कूल अधिकारियों के सामने यातायात की वजह से होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया था। कोई भी बस बनाने वाली कंपनी इन-बिल्ट बायो-टॉयलेट नहीं दे रही थी, इसलिए स्कूल प्रशासन ने बायो-टॉयलेट लगाने के लिए एक अनुभवी फैब्रिकेटर का चुनाव किया।
टीम ने बायो-टॉयलेट लगाने में करीब 10 दिन का समय लिया। एक बायो-टॉयलेट को बनाने की लागत करीब पांच लाख रुपये आई। अब तक, लंबी दूरी की दो स्कूल बसों में बायो-टॉयलेट लगाए जा चुके हैं। दस और बसों में इसे लगाने का काम चल रहा है।
बायो टॉयलेट लगाने से पहले बसों में सीटों की संख्या 35 थी, जो अब घटकर 31 रह गई है, बायो-टॉयलेट टैंक को हर छह महीने में एक बार साफ करना जरूरी है।
लंबी यात्रा करने वाले छात्रों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे दैनिक यात्रा के दौरान आने वाली समस्याएं काफी हद तक कम हो गई हैं।
स्कूल अधिकारियों को उम्मीद है कि देश की इस अनोखी पहल से बेंगलुरू के अलावा दूसरे राज्यों को भी प्रेरणा मिलेगी।