America: अमेरिका ने कहा है कि उसने भारत को उन रूसी जहाजों से तेल खरीदने की “इजाजत” दी है, जो पहले से ही जलमार्गों पर मौजूद है, ताकि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को आसान बनाया जा सके। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा, “दुनिया में तेल की पर्याप्त आपूर्ति है। कल अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत में हमारे सहयोगियों को रूस से तेल खरीदना शुरू करने की इजाजत दी है।”
उन्होंने कहा, “भारतीयों ने बहुत अच्छा सहयोग दिया है। हमने उनसे इस शरद ऋतु में प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना बंद करने को कहा था। उन्होंने ऐसा किया भी। वे इसके बदले अमेरिकी तेल खरीदने वाले थे लेकिन दुनिया भर में तेल की अस्थायी कमी को पूरा करने के लिए हमने उन्हें रूसी तेल को खरीदने की इजाजत दी है। हम अन्य रूसी तेलों पर से प्रतिबंध हटा सकते हैं।”
बेसेंट ने आगे कहा, “प्रतिबंधित कच्चे तेल के करोड़ों बैरल समुद्र में मौजूद हैं और संक्षेप में प्रतिबंध हटाकर वित्त मंत्रालय आपूर्ति बढ़ा सकता है और हम इस पर विचार कर रहे हैं। हम इस संघर्ष के दौरान बाजार को राहत देने के लिए लगातार उपाय घोषित करते रहेंगे।” ट्रंप प्रशासन के कई अन्य अधिकारियों ने भी कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मॉस्को से तेल खरीदने पर दिल्ली पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने के महीनों बाद अमेरिका ने अब भारत को रूसी तेल खरीदने की इजाजत दी है।
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका “भारत में अपने दोस्तों” को दक्षिणी एशिया के आसपास जहाजों पर मौजूद रूसी तेल को लेने, उसे परिष्कृत करने और बाजार में तेजी से स्टॉक पहुंचाने की इजजात दे रहा है ताकि निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके और ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजराइल युद्ध के बीच दबाव कम हो सके।
राइट ने कहा, “हमने तेल की कीमतों को कम रखने में मदद के लिए अल्पकालिक उपाय लागू किए हैं। हम भारत में अपने मित्र देशों को जहाजों पर मौजूद तेल लेने, उसे परिष्कृत करने और उन बैरलों को तेजी से बाजार में पहुंचाने की इजाजत दे रहे हैं। आपूर्ति को सुचारू बनाने और दबाव कम करने का ये एक व्यावहारिक तरीका है।”
उन्होंने कहा, “लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से पैदा होने वाली बाधाओं के कारण तेल की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हुई है, हम एक अल्पकालिक कार्रवाई कर रहे हैं और कह रहे हैं कि दक्षिण एशिया के आसपास मौजूद सारा तैरता हुआ रूसी तेल भंडार, चीन द्वारा समर्थित है, चीन अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है, इसलिए बड़ी मात्रा में तैरते हुए बैरल ऐसे ही पड़े हुए हैं।”
राइट ने कहा, “हमने भारत में अपने दोस्तों से संपर्क किया और कहा, ‘वो तेल खरीदो। उसे अपनी रिफाइनरियों में लाओ।’ इससे भंडारित तेल तुरंत भारतीय रिफाइनरियों में आ जाएगा और दुनिया भर की अन्य रिफाइनरियों पर तेल खरीदने का दबाव कम हो जाएगा क्योंकि अब उन्हें उस बाजार में भारतीयों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ेगी।”
उन्होंने आगे कहा, “इसलिए हमारे पास इस तरह के कई उपाय हैं, जो अल्पकालिक और अस्थायी हैं। रूस के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं है। ये नीति में एक बहुत ही संक्षिप्त बदलाव है, जिसका मकसद तेल की कीमतों को सामान्य से थोड़ा बेहतर बनाए रखना है।” ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच, अमेरिका ने कहा कि वो भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है।
बेसेंट ने कहा था, “राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के परिणामस्वरूप तेल और गैस उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए अमेरिकी वित्त विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि ये “जानबूझकर उठाया गया अल्पकालिक कदम” रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं होगा क्योंकि ये केवल समुद्र में फंसे तेल से संबंधित लेनदेन को ही अधिकृत करता है। बेसेंट ने कहा, “भारत, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और हमें पूरी उम्मीद है कि दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। ये अंतरिम उपाय ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने के प्रयास से उत्पन्न दबाव को कम करेगा।”
ट्ंप ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था और प्रशासन का दावा था कि दिल्ली की खरीद यूक्रेन के खिलाफ रूस को युद्ध लड़ने में ताकत प्रदान कर रही है। पिछले महीने, अमेरिका और भारत ने व्यापार पर एक अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की, और ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर भारत पर लगे 25 फीसदी टैरिफ को हटा दिया, जिसमें नई दिल्ली द्वारा मॉस्को से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया था।
वित्त विभाग द्वारा जारी एक बयान जिसका शीर्षक है ‘पांच मार्च, 2026 से भारत को जहाजों पर लादे गए रूस के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री के लिए अधिकृत किया गया है। पांच मार्च, 2026 को पूर्वी मानक समयानुसार रात 12:01 बजे या उससे पहले प्रतिबंधित थे, चार अप्रैल, 2026 को पूर्वी दिन के उजाले समयानुसार रात 12:01 बजे तक अधिकृत हैं, बशर्ते कि ऐसे कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी या अनलोडिंग भारत के किसी बंदरगाह पर हो और ऐसे कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों का क्रेता भारत के कानूनों के तहत संगठित इकाई हो।”
वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए सामान्य लाइसेंस में कहा गया है कि ये किसी अन्य कार्यकारी आदेश द्वारा निषिद्ध किसी अन्य लेनदेन या गतिविधियों को अधिकृत नहीं करता है, जिसमें ईरान, ईरान सरकार, या ईरानी मूल के सामान या सेवाओं से संबंधित कोई भी लेनदेन या गतिविधि शामिल है जो ईरानी लेनदेन और प्रतिबंध विनियमों द्वारा निषिद्ध है।