Indore: भागीरथपुरा के निवासियों ने जानलेवा पानी संकट को लेकर अधिकारियों पर आरोप लगाया

Indore: एक प्रयोगशाला परीक्षण से पता चला है कि इंदौर में डायरिया (दस्त) के प्रकोप की वजह पीने का दूषित पानी था। इससे कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है और 1,400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया के कारण 10 लोगों की मौत की सूचना मिली है।

हालांकि, स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि इस स्वास्थ्य संकट के कारण छह महीने के बच्चे समेत 14 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। इससे इंदौर के कुछ हिस्सों में पेयजल आपूर्ति में गंभीर खामियों का पता चलता है। इंदौर को पिछले आठ वर्षों से लगातार भारत के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा हासिल है।

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र से सैकड़ों बीमार लोगों को अस्पतालों में भेजा गया है और अधिकारियों की तरफ से बरती गई कथित लापरवाही ने सार्वजनिक आक्रोश पैदा कर दिया है।निवासियों का कहना है कि पीने के पानी में सीवेज मिलने की बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद, इसे सालों से नजरअंदाज किया जाता रहा है।

निवासियों का आरोप है कि बच्चों समेत कई लोगों की जान चली गई, क्योंकि दूषित पानी के बारे में बार-बार की गई शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।  उल्टी और दस्त के मामले एक हफ्ते पहले सामने आए थे। गंदे पानी से मौतों पर लोगों के गुस्से के बाद अधिकारियों ने आखिरकार पाइपलाइनों की मरम्मत शुरू कर दी है।

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में रिसाव मिला है, जो इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति का संभावित कारण हो सकता है। राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को कहा कि मामले की विस्तृत जांच चल रही है। विजयवर्गीय ने दावा किया कि अब तक रिपोर्ट की गई आठ मौतों में से दो से तीन मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई हैं।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि “सीवेज का पानी है। जो मुझे लगता है कि चौकी के पास जो हमें मतलब वहां पर वहीं स्थान सबसे प्रमुख है। बाकी भी हम 100 परसेंट चेक करेंगे। कम से कम उसमें आठ से 10 दिन लगेंगे पूरे कॉलोनी को। पूरे के पूरे माइक्रो चेकिंग के लिए। अभी हम सब पूरे भागीरथपुरे के कार्यकर्ताओं के साथ बैठे थे, चारों तरफ के, तो उन्होंने बोला था कुल आठ डेथ हुई हैं इनके हिसाब से। जिसमें दो-तीन नेचरल है और बाकी अगर उनका क्लेम होगा, उनके ट्रीटमेंट में अगर इस प्रकार की डॉक्टर बताएंगे कि ये दूषित पानी के कारण हुई है। तो उनको भी उसी प्रकार से ट्रीट करेंगे जैसे सामान्य को दिया है।”

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को 1,700 से ज्यादा घरों में जाकर सर्वे किया गया, जिसमें 8,500 से ज्यादा लोग शामिल थे। इनमें से 338 लोगों में उल्टी और दस्त जैसे हल्के लक्षण दिखे, जिन्हें उनके घरों पर ही शुरुआती इलाज दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि 201 मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 32 आईसीयू में हैं।

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