Maharashtra: महिला किसानों को खाद्य प्रसंस्करण से मिला रोजगार का मौका

Maharashtra: महाराष्ट्र में छत्रपति संभाजीनगर जिले के करमाड में महिलाओं को आमदनी का नया जरिया मिला है। वे मक्का और प्याज जैसे जरूरत से ज्यादा पैदा फसलों को सुखाती हैं और उनका प्रसंस्करण करती हैं। पारंपरिक रूप से जब फसलें ज्यादा होती हैं तो किसानों का फायदा कम हो जाता था। प्रसंस्करण की सुविधा होने से न सिर्फ महिलाओं को रोजगार के मौके मिले हैं, बल्कि किसानों की आय स्थिर करने में भी मदद मिली है।

इन प्रसंस्करण इकाइयों को महिलाओं के नेतृत्व वाले एफपीओ ने नाबार्ड की मदद से लगाया है। इससे स्थानीय किसानों को काफी राहत मिली है। प्रसंस्करण इकाइयां विस्तृत आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी हैं। इनके उत्पाद होटलों और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों को भेजे जाते हैं। इनके क्रियाकलाप में पोल्ट्री फीड, तेल उत्पादन और दूसरे खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल मकई की सफाई, ग्रेडिंग और विघटन शामिल हैं।

इन इकाइयों में काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि अब वे खेतों में दैनिक मजदूरी के मुकाबले ज्यादा कमा रही हैं। महाराष्ट्र में फिलहाल 32 एफपीओ हैं, जिनके जरिये करीब 10 हजार किसान परिवारों को मदद मिल रही है। महिलाओं को स्थिर आमदनी के मौके और किसानों को ज्यादा फायदा पहुंचा कर प्रसंस्करण इकाइयां न सिर्फ जरूरत से ज्यादा फसलों का बेहतर इस्तेमाल कर रही हैं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में बदलाव भी ला रही हैं।

जिला विकास प्रबंधक सुरेश पाटवेकर ने कहा, “इनिश्यली स्टेज में जब किसान टमाटर या प्याज या फिर अदरक है इसका उत्पादन लेते थे, तो कभी कभी ऐसा आता था कि उस टाइम पे बहुत ज्यादा प्रोडक्शन हो जाता था और किसान को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। तब हमने हमारी एफपीओ के माध्यम से उस प्रोडक्ट को अगर प्रोसेस किया जाए तो डिहाइड्रेशन सोलर डिहाइड्रेशन के माध्यम से अगर उसको प्रोसेस किया जाए तो उसका वैल्यू एडिशन होगा और किसान को अच्छी उसका मूल्य मिलेगा। इसके अंतर्गत डिहाइड्रेशन का प्रोजेक्ट चालू किया था।”

प्रभावती पदुल ने कहा, “तो इससे पहले हम सोलर ड्रायर का काम करते थे, जिसमें भाव नहीं रहता है। तो हम सूखा कर देते थे। लेकिन हमको ऐसा हुआ कि हमारी यहां मक्का काफी ज्यादा होता है। तो इसलिए हम मक्का में प्रोसेस करने लगे। कि वो जो मक्का आती है। तो हम उसके किलीनिंग करते हैं बाद में ग्रिडिंग। वो जो है 4 एमएम 2 एमएम – ऐसा हम करते हैं। एक स्नैक्स के लिए बनता है और एक पशुखाद्य के लिए हो जाता है और एक का ऑयल बनता है।”

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