Srinagar: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में ट्यूलिप की बहार आ चुकी है, लेकिन समय से पहले। ये कश्मीर के लिए बड़ी उपलब्धि है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक सामान्य मौसम से चार महीने पहले, यानी दिसंबर में ही ट्यूलिप की बहार लाने में कामयाब रहे हैं।
इसके लिए वैज्ञानिकों ने मुख्य रूप से तापमान को नियंत्रित किया। इसकी वजह से अब सालों भर ट्यूलिप का उत्पादन संभव है। इस कामयाबी से ट्यूलिप की खेती करने वाले सर्दियों में मनाए त्योहारों के दौरान भी ट्यूलिप की मांग पूरी कर सकेंगे।
विश्वविद्यालय ने ट्यूलिप बल्ब उत्पादन केंद्र भी स्थापित किया है। इससे हॉलैंड से ट्यूलिप का आयात करना कम हो सकता है।
अब विश्वविद्यालय की योजना ट्यूलिप किसानों को जल्द उगाने की विधि सिखाने की है। इससे जाड़ों में भी फूल उपलब्ध होंगे, जिस समय उनकी मांग काफी रहती है।
बाजार में ट्यूलिप के फूलों की खुदरा कीमत 100 से 150 रुपये प्रति डंठल है। ऐसे में नया अनुसंधान ट्यूलिप किसानों के लिए ज्यादा कमाई करने और ट्यूलिप का आयात कम करने में मददगार साबित हो सकता है।