West Asia: पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा के लिए पाकिस्तान में सम्मेलन…सऊदी अरब, मिस्र, तुर्किये होंगे शामिल

West Asia: पाकिस्तान में  सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों का चतुष्पक्षीय शिखर सम्मेलन होगा जिसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और शांति के लिए बातचीत के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। विदेश कार्यालय के अनुसार, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्री पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जबकि सऊदी अरब के उनके समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के रविवार को पहुंचने का कार्यक्रम है।

इसने बताया कि मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती और तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक डार के निमंत्रण पर इस्लामाबाद पहुंचे। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के अनुसार, ये नेता क्षेत्रीय घटनाक्रम पर विचार-विमर्श करेंगे और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात भी करेंगे।

इसने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि दौरे पर आए विदेश मंत्री ‘‘क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों सहित कई मुद्दों पर गहन चर्चा’’ करेंगे। आधी रात के बाद विदेश कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि डार ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बातचीत की और ‘‘क्षेत्रीय स्थिति में हो रहे बदलाव और जारी घटनाक्रम’’ पर चर्चा की।

डार ने कहा कि उन्होंने तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया और रेखांकित किया कि स्थायी शांति के लिए संवाद और कूटनीति ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। उन्होंने घोषणा की कि ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 और पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने पर सहमति जताई है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘मुझे ये बड़ी खुशखबरी साझा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि ईरान सरकार ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 और पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने पर सहमति जताई है। प्रतिदिन दो पोत इस जलडमरूमध्य को पार करेंगे।’’

डार ने कहा, ‘‘ईरान का ये कदम शांति का संकेत है और यह क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद करेगा।’’ उन्होंने पोस्ट में अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जे. डी. वेंस, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पश्चिम एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अराघची को टैग किया और कहा कि ‘‘संवाद, कूटनीति और भरोसा बढ़ाने वाले ऐसे कदम ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता हैं।’’

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