Lebanon: भारत ने लेबनान में बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता जताई और इस महीने इजराइल के खिलाफ ईरानी हमलों में हिजबुल्लाह के “फैसले” की कड़ी निंदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) में सैनिक योगदान देने वाले लगभग 30 देशों के साथ अपनी सहमति जताई।
भारत उन 50 देशों में शामिल है, जो संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईएफआईएल) में सैनिक योगदान देते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने एक्स पोस्ट में कहा, “आज मैंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यूएनआईएफआईएल में शांति रक्षक के रूप में तैनात बहादुर महिलाओं और पुरुषों के प्रति अपना समर्थन जताया क्योंकि वे बढ़ते खतरों और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा मंत्रालय (यूएनआईएफआईएल) के प्रति प्रतिबद्धता रखने वाले भारतीय शांति सैनिक इन चुनौतीपूर्ण समय में भी अपने दायित्व का निर्वाह कर स्थानीय लोगों की सहायता कर रहे हैं।
हरीश ने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर किसी भी प्रकार के हमले के घोर विरोधी हैं, जिसका कोई औचित्य नहीं हो सकता।” उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2589 शांति सैनिकों की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
अगस्त 2021 में 15 देशों की परिषद की भारत की अध्यक्षता में पारित यूएनएससी प्रस्ताव 2589 में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों की मेजबानी करने वाले या कर चुके सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र कर्मियों की हत्या के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने और शांति अभियानों में सेवारत संयुक्त राष्ट्र कर्मियों के विरुद्ध हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने हेतु सभी उचित उपाय अपनाने की अपील की थी।
हरीश लगभग 30 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के स्थायी प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा परिषद की बैठक में शामिल हुए, जहां उन्होंने लेबनान में शत्रुता बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की।