Ghooskhor Pandat: बॉलीवुड में विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन कभी-कभी सिर्फ एक नाम ही ऐसा तूफान खड़ा कर देता है जो सोशल मीडिया से लेकर अदालतों तक पहुंच जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ है फिल्ममेकर नीरज पांडे की आने वाली वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ के साथ।
जो मामला एक सामान्य प्रमोशन से शुरू हुआ था, वह अब कानूनी कार्रवाई, सार्वजनिक नाराजगी और प्रमोशनल कंटेंट हटाने तक पहुंच चुका है। बढ़ते विरोध के बीच नीरज पांडे ने चुप्पी तोड़ी और सीरीज से जुड़ा पूरा प्रमोशनल मटीरियल हटा दिया।
नीरज पांडे ने तोड़ी चुप्पी
6 फरवरी को नीरज पांडे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने साफ कहा कि ‘घूसखोर पंडत’ एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जिसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि ‘पंडत’ शब्द केवल एक काल्पनिक किरदार का बोलचाल का नाम है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति, उसके काम और उसके फैसलों पर आधारित है, न कि किसी समूह पर।
नीरज पांडे ने कहा कि वे फिल्ममेकिंग को पूरी जिम्मेदारी के साथ करते हैं और उनकी मंशा हमेशा सम्मानजनक और संवेदनशील तरीके से कहानियां कहने की रही है।
क्यों हटाया गया प्रमोशनल कंटेंट
नीरज पांडे ने माना कि सीरीज के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की भावनाएं सच्ची हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। इसी वजह से टीम ने फिलहाल सभी प्रमोशनल पोस्ट, पोस्टर और वीडियो हटाने का फैसला लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी वेब सीरीज को पूरी तरह देखे बिना, सिर्फ छोटे क्लिप्स या पोस्टर्स के आधार पर जज करना सही नहीं है। यह प्रोजेक्ट केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया है और किसी को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।
लखनऊ में FIR, बढ़ता जा रहा गुस्सा
नीरज पांडे के बयान के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। 6 फरवरी को लखनऊ के हजरतगंज थाने में नीरज पांडे और उनकी टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
पुलिस के अनुसार, शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि सीरीज का टाइटल और कंटेंट धार्मिक और जातीय भावनाओं को आहत करता है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। यह FIR हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह द्वारा शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद दर्ज की गई।पुलिस सूत्रों का कहना है कि ब्राह्मण समुदाय और कई सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी है। कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है और साफ कहा है कि सार्वजनिक शांति भंग करने या भावनाएं भड़काने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी है।
दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला
विवाद अब उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें वेब सीरीज की रिलीज और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह याचिका महेंद्र चतुर्वेदी ने अपने वकील विनीत जिंदल के माध्यम से दायर की है। याचिका में कहा गया है कि सीरीज का नाम और प्रस्तावित कंटेंट मानहानिकारक और साम्प्रदायिक रूप से आपत्तिजनक है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि ‘पंडत’ शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ना ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन होती है।
मनोज बाजपेयी का भी बयान
सीरीज का हिस्सा रहे अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। मनोज बाजपेयी ने कहा कि जब किसी प्रोजेक्ट से लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह कलाकार को रुककर सुनने और सोचने पर मजबूर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह भूमिका एक खामियों से भरे इंसान की आत्म-खोज की कहानी थी, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी।
उन्होंने नीरज पांडे के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि निर्देशक हमेशा कहानियों को लेकर गंभीर और संवेदनशील रहे हैं।
अंत में, मनोज बाजपेयी ने प्रमोशनल कंटेंट हटाने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे साफ होता है कि निर्माता जनता की भावनाओं को गंभीरता से ले रहे हैं।