Kerala: त्रिशूर जिले में उम्र को मात देते हुए दस बुजुर्ग महिलाओं ने भरतनाट्यम में अपना पहला मंचीय प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। साठ साल से अधिक उम्र की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि सीखने और सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती।
शनिवार को त्रिशूर के एक छोटे से हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान, इन महिलाओं ने भरतनाट्यम का औपचारिक डेब्यू किया। मंच के पीछे तैयार होती कलाकारों के चेहरों पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। हर मुद्रा और हर कदम में तीन साल की कड़ी मेहनत, धैर्य और समर्पण दिखाई दिया।
इस कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब उद्घाटन के दौरान कलाकारों के पति मंच पर पहुंचे और उनके साथ दीप प्रज्वलन किया। यह पल उनके संघर्ष, समर्थन और पारिवारिक सहयोग का प्रतीक बना।
इन महिलाओं को भरतनाट्यम का प्रशिक्षण देने वाली शिक्षिका आरएलवी सौम्या सुजीत ने बताया कि शुरुआत में उम्र और शारीरिक समस्याओं के कारण सभी हिचकिचा रही थीं। घुटनों का दर्द, पैरों की तकलीफ और यह डर कि इस उम्र में शास्त्रीय नृत्य संभव नहीं है, बड़ी चुनौती थी। लेकिन निरंतर प्रोत्साहन और अभ्यास से उन्होंने बुनियादी ‘अदावु’ से लेकर मंचीय प्रस्तुति तक का सफर तय किया।
यह सफर कुट्टानेल्लूर हिल गार्डन्स रेजिडेंस एसोसिएशन से शुरू हुआ था, जहां ये महिलाएं पहले थिरुवथिराकली (लोक नृत्य) का अभ्यास करती थीं। वहीं से शास्त्रीय नृत्य सीखने का विचार जन्मा, जो आगे चलकर भरतनाट्यम में औपचारिक प्रशिक्षण में बदल गया। कोविड-19 के बाद नियमित अभ्यास शुरू हुआ और तीन साल बाद यह सपना साकार हुआ।
प्रदर्शन के दौरान कलाकारों के बच्चे, नाती-पोते और पड़ोसी दर्शक दीर्घा में मौजूद रहे। तालियों और मुस्कुराहटों के बीच पूरा माहौल प्रेरणादायक बन गया।
इस समूह में अनीता, दीपा, जोफी, लैला, मैरीस, पॉलीन, सीमा, शीला, शाइनी और सुनीता शामिल हैं। गृहिणियों और रिटायर्ड महिलाओं के इस समूह ने यह संदेश दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने उम्र और शारीरिक सीमाएं भी हार मान लेती हैं।
त्रिशूर की ये महिलाएं आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो किसी न किसी डर या बाधा के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं।