पेड़ बचाएंगे पानी

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रेनू उप्रेती 

अपने अमृत जैसे जल के लिए जानी वाले दूवभूमि के पहाड़ों में प्राकृतिक जल स्रोत धीरे-धीरे सुख रहे हैंये ऐसा संकेत है जिससे साफ झलकता है कि अगर जल ही खतरे में है तो मानव सभ्यता का कल भी खतरे में होगा,, जल ही जीवन है जल से हमारी सुबह से लेकर शाम तक की अधिकांश क्रियाए होती है,,वर्तमान में जल की समस्या इतनी बढ़ गयी है कि हमे शुद्ध जल तो दूर जल ही मुश्किल से नसीब हो रहा है इसका सबसे बड़ा कारण कहीं न कहीं पेड़ो का अत्यधिक मात्रा में कटान हैजंगल गायब है कही जंगलो में गर्मी,प्रदुषण के चलते आग लग जा रही है तो कही मानव खुद ही पेड़ो का कटान कर रहा है जबकि पेड़ो से ही जल संरक्षित होता है पहाड़ो में पाए जाना वाले  बाँज के पेड़ जल संग्रह में 23 प्रतिशत, चीड़ 16 प्रतिशत, खेत 13 प्रतिशत, बंजर भूमि 5 प्रतिशत और शहरी भूमि सिर्फ 2 प्रतिशत का योगदान करते हैं। लेकिन यदि पेड़ ही नहीं रहेंगे और भूमि बंजर होती चली जाएगी तो निश्चित तौर पर जल भी संरक्षित नहीं होगा  और जिस प्रकार आज भूमि बंजर होती जा रही है ठीक उसी प्रकार हमारे प्राकृतिक जल स्रोत भी बंजर सूखते जायेंगे और जहां वर्तमान समय में पानी की किल्ल्त बढ़ रही है वहा भविष्य में पानी बिलकुल नहीं रहेगा और  जल ही जीवन है  कथन को जल नहीं जीवन नहीं में बदलने में देर नहीं लगेगी। शुरुवात हमे खुद से करनी है पर्यावरण को बचना है ताकि जल भी सुरक्षित रहे। 

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2 COMMENTS

  1. भाषण बाजी से बाज आयें। धरातल पर कोई कार्य किया जाना चाहिए।

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