राहत कुरैशी से राहत इंदौरी तक का सफर

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जहाँ हर ओर जन्माष्टमी की धूम थी वहीँ मंगलवार रात एक दुखद खबर आयी, दिग्गज शायर  राहत इंदौरी का निधन हो गया।
मैं जब मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना,लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना”

 जैसी रूह छू देने वाली शायरियों के बादशाह राहत इंदौरी बीते कुछ समय से बीमार चल रहे थे। 70 वर्षीय शायर हाल ही में कोरोना पॉजिटिव पाए गए ,और फिर उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। राहत इंदौरी के निधन पर पूरे देश में लोगो ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनकी शायरियां सोशल मीडिया पर शेयर करी।

राहत बतौर शायर तो बहुत मशहूर थे ही लेकिन साथ ही उन्होंने बॉलीवुड के लिए भी तमाम नगमे लिखी थीं।   कम ही लोग इस बात से वाकिफ है कि राहत बॉलीवुड के लिए गाने भी लिखा करते थे। फिल्म इश्क, तमन्ना, जुर्म और मुन्ना भाई एमबीबीएस जैसी फिल्मों के लिए राहत साहब ने छन्न छन्न, तुमसा कोई प्यारा, मेरी चाहतों का समंदर तो देखो, नींद चुराई मेरी किसने ओ सनम जैसे गाने लिखे थे जो कि काफी पॉपुलर हुए। हालांकि आमतौर पर फिल्म के गानों का क्रेडिट सिंगर या उस फिल्म में काम करने वाले एक्टर ले जाते हैं इसलिए बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि बॉलीवुड गाने भी लिखा करते थे राहत।

राहत के अज़ीज़ दोस्त और नामचीन शायर डा. नवाज देवबंदी ने उनके निधन पर गहरे दुख का इजहार करते हुए कहा कि राहत साहब मुशायरों के बादशाह थे। उनका अचानक इस तरह चले जाना ङ्क्षहदी और उर्दू अदब की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। उनपर अक्सर ये इलज़ाम लागये जाते थे की वह एक कम्युनल शायर है लेकिन सचाई तो ये थी की वह कड़वा सच आगे रखने की हिम्मत रखते थे।

राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 में इंदौर में हुआ था। उर्दू  भाषा के वे गहरे जानकार थे, छात्र जीवन में ही उन्हें शायरी और लेखन का शौक हो गया, इंदौर की यूनिवर्सिटी देवी अहिल्या में प्रोफेसर रहकर उन्होंने उर्दू भाषा पर बहुत काम किया। उनके शायरों के चर्चे हर तरफ होने लगे, और वह हर महफ़िल की शान बनने लगे 

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