बेटियों पर डिम्पल सानन की कविता

0
528

डिम्पल सानन,देहरादून

पराई बगिया

बोलो बेटियाँ कब किसने,

खुद के लिए पाली हैं….

चंद दिनों की रौनक है,

फिर होना घर खाली है……

बेगाने इन फूलों के,

माँ-बाप बस माली हैं….

उड़ गई वो तितली सी,

सूनी रह गई ड़ाली है……

बोलो बेटियाँ कब किसने,

खुद के लिए पाली हैं….

दहेज की जब बात आई,

तब रात आई काली है…..

बाबा ने दुकान बेची,

माँ ने बेची बाली है…..

बोलो बेटियाँ कब किसने,

खुद के लिए पाली हैं….

पीकर घूँट-घूँट विष का परी ने,

रूह अमृत सी बना ली है….

खुद डूब के अश्क-ए-अंगारों में,

दो घरों की इज्ज़त बचा ली है….

बोलो बेटियाँ कब किसने,

खुद के लिए पाली हैं….

चंद दिनों की रौनक है,

फिर होना घर खाली है……

Spread the love

LEAVE A REPLY