New Delhi: सोचने की क्षमता और रचनात्मकता को एआई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता- अजय सूद

New Delhi: सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए कहा है कि मनुष्य अपनी रचनात्मकता और सोचने की क्षमताओं को मशीन के भरोसे नहीं छोड़ सकता।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ से पहले पीटीआई वीडियो से साक्षात्कार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल कर निर्मित ‘डीपफेक’ की समस्या से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों का उपयोग करने का समर्थन किया हालांकि उन्होंने यह तर्क भी दिया कि सख्त कानून ‘‘नवोन्मेष को खत्म कर सकता है’’।

सूद ने एआई के कारण मनुष्यों के सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो जाने के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘हमें इस पर ध्यान देना होगा। मैं सहमत हूं कि अगर आप युवा पीढ़ी को लेकर सतर्क नहीं रहते हैं, तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।’’

सूद ने दैनिक जीवन में कैलकुलेटर के बढ़ते उपयोग और बाद की पीढ़ियों में पहाड़ों का इस्तेमाल कम होने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप अपने सोचने-समझने का काम दूसरों को सौंप देते हैं तो यह मनुष्य के लिए बहुत बुरा है। मनुष्य सोचने के लिए ही बने हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता मनुष्यों की सोचने-समझने की क्षमता से उत्पन्न हुई है। अब आप अपनी रचनात्मकता, सोचने-समझने की अपनी क्षमता को किसी मशीन को नहीं सौंप सकते। यही खतरा है।’’ सूद ने एआई के उपयोग के लिए सुरक्षा उपायों की वकालत की, विशेष रूप से विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में।

शीर्ष वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी मतिभ्रम उत्पन्न कर सकती है। यदि लोग सावधान नहीं रहे तो वे उस मतिभ्रम को वास्तविकता मान लेंगे, जो बेहद खतरनाक है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यहीं पर मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।’’ बच्चों और महिलाओं के अश्लील चित्रण को लेकर हालिया ग्रोक विवाद पर सूद ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त हैं।

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