New Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए शुरुआत बेहद खराब हवा और प्रदूषण के लगातार बढ़ते स्तर के साथ हुई, वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी रही।
दिल्ली में सुबह एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 332 दर्ज किया गया, पिछले दो हफ्ते से ज्यादा वक्त से ये इलाका जहरीली हवा की चादर से ढका हुआ है। जानकारों का कहना है कि खराब हवा लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही है।
हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग प्रदूषित हवा की वजह से लंबे वक्त से खांसी, थकान और सांस लेने में तकलीफ का सामना कर रहे हैं।
पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसे हालात को स्वास्थ्य आपातकाल मानते हुए कदम उठाए जाने चाहिए। पर्यावरणविद भवरीन कंधारी ने बताया कि “ज्यादातर लोगों को तो पता भी नहीं है कि उनके साथ क्या हो रहा है। इसलिए यह चिंता की बात है, और यह बहुत जरूरी है कि इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल माना जाए।
जब आप स्वास्थ्य आपातकाल कहते हैं, तो कुछ लोग मुझसे पूछते हैं, लेकिन स्वास्थ्य आपातकाल जरूरी है, हमने देखा कि कोविड कैसा था और स्वास्थ्य आपातकाल का इलाज कैसे किया जाता है। इसलिए जब नेता इसे सबसे ज्यादा अहमियत देंगे, तो लोग भी इसे फ़ॉलो करेंगे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण और बायोमास जलाने से लेकर त्योहार पर होने वाली आतिशबाजी तक प्रदूषण का हर स्रोत असर डाल रहा है। वे सभी लोगों से प्रदूषण की इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हैं।
पर्यावरणविद भवरीन कंधारी ने बताया कि “नागरिकों के रूप में, हमें बहस नहीं करनी चाहिए। हर उत्सर्जन का स्रोत महत्वपूर्ण है, चाहे वो बायोमास हो, पूरे साल निर्माण काम हो, या आपने अभी सीजन की शुरुआत आतिशबाजी से की हो और जिसे मैंने सुबह भी सुना। इसलिए हर उत्सर्जन के स्रोत का ध्यान रखना जरूरी है… हम दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर हैं। हम और कोई गलती बर्दाश्त नहीं कर सकते, इसलिए मैं सोचती हूं कि हम सब एक साथ आएं और इसके खिलाफ लड़ें।”
वहीं उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता से संबंधित एक याचिका पर तीन दिसंबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई, न्यायालय ने कहा कि इस मुद्दे की नियमित रूप से निगरानी की आवश्यकता है।