Nitish Kumar: ‘सुशासन बाबू’ से राज्यसभा तक…नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

Nitish Kumar: जेडीयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भर दिया, इसके साथ ही उन्हें बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा, 2025 के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ एनडीए को भारी जीत दिलाने के बाद नीतीश कुमार के पद छोड़ने से बीजेपी के किसी नेता को सूबे की कमान मिल सकती है।

नीतीश कुमार 2005 से कुछ समय को छोड़कर राज्य की अगुवाई कर रहे हैं। बिहार के लिए नीतीश इतने जरूरी और अहम क्यों हैं, 2025 के चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं और विशेषज्ञों ने उनकी सेहत, उम्र और राज्य का नेतृत्व करने की उनकी काबिलियत पर सवाल उठाए थे लेकिन नीतीश ने एक बार फिर मुख्यमंत्री बनकर उन्हें गलत साबित कर दिया।

एक मार्च 1951 को बिहार के नालंदा जिले के कल्याण बिगहा के साधारण परिवार में बच्चे का जन्म हुआ। नाम रखा गया मुन्ना, आगे चलकर यही मुन्ना नीतीश कुमार बने। उनके पिता कविराज राम लखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा के करीबी माने जाते थे।

दो दशक से बिहार की राजनीति में चोटी पर रहे नीतीश कुमार समाजवादी ब्रिगेड से हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग कॉलेज और आज के एनआईटी से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने राजनीति का ककहरा राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, कर्पूरी ठाकुर और वी. पी. सिंह जैसे धुरंधरों से सीखा।

1985 में वो पहली बार चुनाव जीत कर बिहार विधान सभा और 1989 में पहली बार संसद पहुंचे। उसके बाद लगातार दसवीं, ग्यारवीं, बारहवीं, तेरहवीं और चौदहवीं लोक सभा चुनाव में जीत हासिल की। कृषि और रेलवे सहित कई महत्वपूर्ण विभागों को संभालते हुए केंद्रीय मंत्री के रूप में काम किया।

तीन मार्च 2000 को नीतीश ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन बहुमत नहीं होने की वजह से सिर्फ सात दिन में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। नीतीश कुमार को सियासी समीकरण बिठाने में महारत हासिल है। यही वजह रही कि कॉलेज के दिनों में आंदोलन के साथी रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद से नाराज होकर उन्होंने 1994 में उनका साथ छोड़ दिया।

बाद में उन्होंने कई गठबंधन बनाए – कभी वैचारिक सहयोगियों के साथ तो कभी उनके राजनीतिक शत्रुओं के साथ। मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार ने राज्य में विकास के कई काम किए। पुलिस और प्रशासन में सुधार किया और राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत की।

बिहार के विकास में उनके योगदान की वजह से उन्हें ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाना जाता है, नीतीश कुमार ने 2016 में बिहार में शराबबंदी कानून लागू कर महिला वोटर्स का दिल जीतने की कोशिश की। 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को इसका फायदा भी मिला। 2020 और 2025 के चुनाव नतीजे उनके इस फैसले की सफलता को दिखाते हैं।

गुरुवार को ऐलान करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वो अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत से ही बिहार विधानसभा के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों का सदस्य बनना चाहते थे।

राज्य विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए नीतीश कुमार का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय है। अगर बिहार में कोई बीजेपी नेता उनकी जगह लेता है, तो राज्य को भगवा पार्टी से अपना पहला मुख्यमंत्री मिलेगा। बिहार हिंदी पट्टी का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अब तक भगवा पार्टी से कोई भी नेता मुख्यमंत्री नहीं बना है।

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